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स्पेशल रिपोर्ट: छोटे रक्षा उद्योग बंद होने के कगार पर, आर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड ने अचानक आर्डर लेने से मना किया

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री

नई दिल्ली। आर्डनेंस  फैक्टरियों को  कलपुर्जे सप्लाई करने वाले मझोले और छोटे रक्षा उद्योंगों पर अचानक सरकार ने कहर ढा दिया है। आर्डनेंस फैक्टरियों ने छोटे और मझोले उद्योगों को इस साल  दिये गए  करीब छह हजार करोड़ रुपये का आर्डर लेने से अचानक मना  कर दिया है जिससे लाखों लोगों को बेरोजगार होना पड़ सकता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को भारी धक्का लग सकता है।





‘फेडरेशन आफ एमएसएमई वेंडर्स आफ डिफेंस एंड एरोस्पेश’ के  आला पदाधिकारियों ने यहां एक बातचीत में आरोप लगाया कि रक्षा मंत्रालय के तहत आर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड के इस फैसले के पीछे देश की एक प्रभावशाली आयात लाबी काम कर रही है।

अधिकारियों ने यहां बताया कि आर्डर को रद्द करने वाला एक प्रपत्र रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने फेडरेशन को भेजकर  कहा है कि  आर्डर दिये हुए उत्पादों की सप्लाई तत्काल रोक दे। फेडरेशन के प्रेजिडेंट ने यहां कहा कि सरकार के इस फैसले से करीब तीन लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे औऱ हजारों छोटे और मझोले उद्योग बंद हो जाएंगे।

अधिकारियों का आरोप है कि जो रक्षा उत्पाद देश के छोटे और मझोले उद्योग बनाते थे उनकी सप्लाई अब देश के कुछ बड़े कारपोरेट समूहों से करने को कहा जा सकता है जिनके पास चूंकि कोई मौजूदा क्षमता नहीं है इसलिये वे चीन जैसे देशों से उन्हीं रक्षा उत्पादों को भारतीय आर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड को हासिल कर सप्लाई कर सकते हैं।

फेड़रेशन ने कहा कि चूंकि रक्षा मंत्रालय ने सप्लाई रोकने का फैसला अचानक बताया इसलिये हजारों करोड़ के रक्षा उत्पाद बन कर बेकार होने के कगार पर हैं और इससे छोटी कम्पनियों की आर्थिक हालत खस्ता हो जाएगी और इन कम्पनियों से ज़ुड़े लाखों लोगों के जीवन यापन पर असर  पड़ेगा। ऐसे दौर में जब सरकार देश में ही अपने लोगों को रोजगार देने के लिये रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया को बढावा दे रही है रक्षा मंत्रालय का ताजा फैसला समझ से परे है। फेडरेशन ने बताया कि सरकार ने खुद फैसला किया था कि आर्डनेंस फैक्टरी को धीरे धीरे देश के छोटे उद्योगों पर अधिक निर्भर बनाया जाएगा लेकिन ताजा फैसले से देश के कुछ चुनिंदा बड़े कारपोरेट समूहों को फायदा होगा।

फेडरेशन ने प्रधानमंत्री कार्यालय  से लेकर रक्षा मंत्रालय तक का इस बारे में ध्यान आकर्षित करने केलिये ज्ञापन भेजा है लेकिन किसी ने आर्डर कैंसल करने की वजह बताने की जरूरत नहीं समझी है।

 

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