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स्पेशल रिपोर्ट: पनडुब्बी मिसाइल की नई किस्म का विकास किया भारत ने

समंदर से छोड़ी गई बैलिस्टिक मिसाइल
समंदर से छोड़ी गई बैलिस्टिक मिसाइल (सौजन्य- गूगल)

नई दिल्ली। पनडुब्बी से छोड़े जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल की एक दूसरे से बेहतर क्षमता हासिल करने की भारत और पाकिस्तान के बीच होड़ तेज हो गई है। हालांकि भारत ने K-15 या B- 05 नाम की बैलिस्टिक मिसाइल का विकास किया जिसकी मारक दूरी 700 किलोमीटर बताई गई थी लेकिन अब एक ताजा आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है कि भारतीय मिसाइल वैज्ञानिकों ने B- 05 मिसाइल की तकनीक के आधार पर पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली लम्बी दूरी तक मार करने वाली नई बैलिस्टिक मिसाइल(एसएलबीएम) का भी विकास कर लिया है।





यहां रक्षा सूत्रों ने कहा कि पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली यह एसएलबीएम तीन हजार किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है।

ध्यान रहे कि पाकिस्तान ने गत 30 मार्च को 450 किलोमीटर दूर तक मार करने वाली ‘बाबर’ नाम की सबमरीन लांच्ड बैलिस्टिक मिसाइल (एसएलबीएम) को अपनी एक पनडुब्बी से छोड़ कर यह एलान किया था जिसकी बदौलत उसने दावा किया था कि उसने परमाणु हमले के जवाब में सेकंड स्ट्राइक क्षमता यानी दुश्मन पर जवाबी हमले की क्षमता हासिल कर ली है जो समुद्र आधारित है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने खुद इस मिसाइल का विकास किया है लेकिन सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में  इतनी तकनीकी क्षमता नहीं है कि वह अपने बलबूते पनडुब्बी से छोड़े जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का विकास कर सके। पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान ने जिस ‘बाबर मिसाइल’ के विकास का दावा किया है वास्तव में चीन ने पाकिस्तान को उसकी सप्लाई की है।

यहां रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा अपने वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को पुरस्कृत करने के लिये आय़ोजित एक समारोह में B- 05 मिसाइल की मौजूदगी का पहली बार आधिकारिक स्तर पर खुलासा किया औऱ यह भी कहा कि B- 05 मिसाइल के विकास के जरिये  लम्बी दूरी वाली एसएलबीएम यानी पनडुब्बी से छोड़े जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (लांग रेंज एसएलबीएम) का विकास करने का रास्ता साफ हो गया है।

पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल छोड़ने का रणनीतिक लाभ यह है कि यह समुद्र के भीतर पनडुब्बी में छुपा कर तैनात रखी जा सकती है औऱ यदि दुश्मन देश दवारा किसी जमीनी ठिकाने पर परमाणु हमला किया जाता है और अपनी सेना यदि जमीनी बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की स्थिति में नहीं है तो उसकी पनडुब्बी पर तैनात बैलिस्टिक मिसाइल को दुश्मन पर परमाणु हमला करने का निर्देश दिया जा सकता है।

गौरतलब है कि भारत ने अपनी परमाणु अवधारणा में वादा किया है कि वह दुश्मन पर तब तक प्रथम परमाणु हमला नहीं करेगा जब तक कि उस पर पहला परमाणु हमला नहीं किया जाता है। लेकिन यदि प्रथम परमाणु हमला हो जाता है तो उसके जवाब में समुद्र के भीतर विचरण कर रही पनडुब्बी में तैनात की गई परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल जवाबी प्रहार यानी सेकंड स्ट्राइक के तौर पर छोड़ी जा सकती है ताकि दुश्मन के प्रथम परमाणु हमला का असरकारी तरीके से जवाब दिया जा सके।

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अब तक आधिकारिक तौर पर यह नही कहा था कि भारतीय मिसाइल वैज्ञानिकों ने किसी पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल (बी-05) का सफल परीक्षण किया है। अब तक डीआऱडीओ यही कहता रहा है कि एसएलबीएम का परीक्षण पोंटून से ही किया गया है। बी-05 मिसाइल बनाने वाले  डीआरडीओ के इन वैज्ञानिकों को यहां रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सम्मानित किया। इसके प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि वैज्ञानिकों ने कई नये डिजाइन के जरिये बी-05 मिसाइल को अधिक प्रभावी बनाया जिसकी  बदौलत अब लम्बी दूरी की पनडुब्बी से छोड़े जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का विकास किया जा सकता है।

 

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