Army

स्पेशल रिपोर्टः फ्रांस में भारतीय सैनिकों की याद में बना स्मारक

स्मारक

नई दिल्ली।  एक शताब्दी पहले लड़े गए प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में फ्रांस के विलर्स गुइसलां में भारत सरकार की ओर से एक राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया है जिसका उद्घाटन  10 नवम्बर को किया जाएगा। इस मौके पर भारत सरकार के आला प्रतिनिध मौजूद रहेंगे।





प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य की तरफ से भारतीय सेना के 10 लाख से अधिक सैनिक यूरोप, अफ्रीका और खाड़ी के मोर्चे पर भेजे गए थे जिनमें से 74 हजार से अधिक सैनिक शहीद हुए थे। पहला विश्व युद्ध जुलाई, 1914 से 11 नवम्बर, 2018 तक लड़ा गया था और इसमें भारतीय सैनिकों के असीम योगदान को पहली बार सरकारी तौर पर याद किया जा रहा है। विदेशों में भारत का यह दूसरा राष्ट्रीय स्मारक होगा। पहला स्मारक बेल्जियम में  मेनिन गेट के नजदीक याप्रे के परिसर में बना हुआ है। लेकिन फ्रांस में बना स्मारक अपनी तरह का पहला भारतीय स्मारक होगा जो पूरी तरह भारतीय सैनिकों को समर्पित होगा।

भारतीय सैनिकों के योगदान को याद करने के लिये शताब्दी समारोह ब्रिटिश हाई कमीशन, भारतीय थलसेना और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन (यूएसआई) के आपसी सहयोग से मनाया जा रहा है।

फ्रांस में बनाया गया स्मारक यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन (यूएसआई) के सहयोग से भारत सरकार द्वारा बनाया गया है। इस बारे में जानकारी देते हुए यहां यूएसआई के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल पीके सिंह ने बताया कि ग्रेट वार के नाम से ज्ञात पहले विश्व युद्ध में भारतीयों की भागीदारी के बारे में पिछले चार सालों के भीतर गहन शोध और सर्वेक्षण कार्य किये गए हैं जिससे भारतीयों की भागीदारी को लेकर नई बातें उजागर हुई हैं।

जनरल सिंह के मुताबिक शताब्दी समारोहों के जरिये भारत तीन उद्देश्य हासिल करेगा। इससे भूलाए गए शहीदों की याद ताजा करने के साथ उनके त्याग का सम्मान किया जाएगा, इतिहास की साझा यादों को साझेदार देशों के साथ याद कर उनके साथ रिश्तों का नया पुल बनाया जाएगा और युद्ध की निरर्थकता को उजागर करते हुए यह बताने की कोशिश की जाएगी कि देशों के बीच विवादों को युद्ध के बिना भी हल किया जा सकता है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिक ब्रिटिश सेना की ओर से बेल्जियम, फ्रांस, पूर्वी अफ्रीका और इराक में भेजे गए थे।

हालांकि पहले विश्व युद्ध के दौरान भारत पर ब्रिटेन का शासन था और शुरू में इसे ब्रिटिश साम्राज्य के युद्ध अभियानों को समर्थन दे कर अपनी वफादारी साबित करने जैसा बताया जाता है लेकिन तब महात्मा गांधी ने इसे अपना समर्थन देते हुए कहा था कि यदि भारत को अधिक राजनीतिक जिम्मेदारी हासिल करनी है तो इसे जरूरत के वक्त ब्रिटिश साम्राज्य को अपना बिना शर्त समर्थन देना होगा। लेकिन आजादी मिलने के बाद प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत के योगदान की आधिकारिक तौर पर कोई चर्चा नहीं हुई और इसे लोगों ने अपने जेहन से निकाल ही दिया।

अब इंडिया एंड ग्रेट वार शताब्दी समारोह प्रोजेक्ट के जरिये भारतीय जनमानस को फिर याद दिलाया जा रहा है कि लाखों भारतीयों ने जो हमारे पूर्वज थे किस तरह अपनी बहादुरी और अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी सैन्य रेजिमेंटों के लिये खून बहाया।

जनरल सिंह ने कहा कि यूरोपीय लोगों की शिकायत रहती है कि पहले विश्व युद्ध में भाग लेने वाले बहादुर सैनिकों को सलाम करना चाहती है लेकिन आप( भारत) हमें ऐसा करने का मौका नहीं देते हैं। फ्रांस में बनाया गया भारत का राष्ट्रीय स्मारक इसी इरादे से बनाया जा रहा है।

 

Comments

Most Popular

To Top