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Special Report: भारत-अमेरिका के बीच पहली टू प्लस टू वार्ता छह जुलाई को

भारत-अमेरिका का फ्लैग
भारत-अमेरिका का फ्लैग (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के आने के बाद पहली बार भारत और अमेरिका के बीच आपसी सुरक्षा मसलों पर दो टूक बातचीत होगी। यह  बातचीत टू प्लस टू डायलाग के तहत हो रही है। इस बातचीत के लिये विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण छह जुलाई को वाशिंगटन पहुंचेंगी जहां उनकी अमेरिकी  विदेश मंत्री माइकेल आर पोम्पियो औऱ रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ  उच्चस्तरीय बैठक  होगी।





भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू डायलाग कुछ महीने पहले ही होने वाली थी लेकिन तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री  रेक्स टिलरसन के हटाये जाने के बाद वार्ता की तिथियां स्थगित कर दी गईं। यह बातचीत भारत औऱ अमेरिका के बीच हाल में कई मसलों को लेकर पैदा विवाद की पृष्ठभूमि में हो रही है। अमेरिका ने भारत से कहा है कि रूस से एस-400 एंटी बैलिस्टिक मिसाइल नहीं खरीदे अन्यथा इसका असर  भारत अमेरिका रक्षा सहयोग पर पड़ सकता है।

टू प्लस टू डायलाग को लेकर भारत और अमेरिकी विदेश मंत्रालयों ने बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। दोनों पक्षों ने कहा है कि इस वार्ता के दौरान दोनों पक्ष अपने सामरिक औऱ सुरक्षा सम्बन्धों को गहरा करने के बारे में विचार करेंगे।

दोनों देशों के बीच टू प्लस टू डायलाग का वार्ता ढांचा पिछले साल 25-26 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के  वाशिंगटन दौरे में  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से हुई बातचीत के बाद  तय हुआ था। टू प्लस टू डायलाग के दौरान दोनों पक्षों के आला अधिकारी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर अपने विचार साझा करेंगे।

माना जा रहा है कि इस बातचीत के दौरान भारत को रूस से मिल रही एस-400 एंटी बैलिस्टिक मिसाइल पर अमेरिकी एतराज पर गहन चर्चा होगी। भारत ने पहले  ही कह दिया है कि रूस के साथ इस मिसाइल को लेकर सौदे पर बातचीत अंतिम दौर में है। भारत ने इस तरह संकेत दिया है कि अमेरिकी एतराज के बावजूद भारत रूस से अपने रक्षा सहयोग के रिश्तों में किसी तरह की कमी नहीं लाएगा।

टू प्लस टू डायलाग के दौरान अमेरिका द्वारा प्रस्तावित कई मौलिक रक्षा समझौतों पर भारत की  जल्द मंजूरी का भी मसला अमेरिकी पक्ष उठाठएगा। इसमे कोमकासा ( कम्युनिकेशंस , कम्पैटिबिलीटी एंड सीक्युरिटी एग्रीमेंट ) और बेका( बेसिक एक्सचेंड एंड कोआपरेशन एग्रीमेंट) शामिल है । विदेश और रक्षा मंत्रियों की साझा बैठक में हिंद प्रशांत सागरीय इलाके में भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग के मसले पर भी गहन बातचीत होने की उम्मीद है।

 

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