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स्पेशल रिपोर्ट: तालिबान से बातचीत में भारत दूर न रहे- आर्मी चीफ रावत

बिपिन रावत

नई दिल्ली। थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने फिर कहा है कि भारत को तालिबान के साथ चल रही विभिन्न देशों की बातचीत में भागीदार बनना चाहिये। यहां थलसेना दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में थलसेना प्रमुख ने कहा कि अफगानिस्तान से हमारे हित जुड़े हैं इसलिये वहां के घटनाक्रम से हम बाहर नहीं रह सकते।





गौरतलब है कि बुधवार को  रायसीना डायलॉग में भी एक कार्यक्रम में थलसेना प्रमुख ने तालिबान से बातचीत का सुझाव दिया था। भारत ने अब तक आधिकारिक तौर पर तालिबान से चल रही अंतरराष्ट्रीय बातचीत में हिस्सा नहीं लिया है लेकिन गत अक्टूबर माह  में मास्को में अफगान मसले पर हुई बैठक में भारत ने अपने गैर आधिकारिक प्रतिनिधि को भेजा था। मास्को फार्मेट के तहत आयोजित इस बैठक  का आयोजन रूस द्वारा किया गया था जिसमें चीन, पाकिस्तान सहित मध्य एशियाई देशों को आमंत्रित किया गया था।

भारत अब तक यही कहता रहा है कि अफगान समस्या का हल अफगानियों की अगुवाई में ही निकाला जा सकता है। अफगानिस्तान संकट में लम्बे अर्से से उलझे अमेरिका ने भी कुछ साल पहले तालिबान से बातचीत का दौर शुरु किया था लेकिन तालिबान मांग करता रहा है कि अमेरिका पहले अपने सैनिक अफगानिस्तान से वापस  हटाए। भारत की चिंता है कि अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापस लौटी तो वहां भारत के विकास निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

गुरुवार को यहां थलसेना प्रमुख ने कहा कि कई देश तालिबान से बातचीत कर रहे हैं और भारत को यदि लगता है कि उसके हित अफगानिस्तान से जुड़े हैं तो भारत को इस बातचीत से बाहर नहीं रहना चाहिये। उन्होंने कहा  कि बेशक अफगानिस्तान में हालात पहले से बेहतर हुए हैं , वहां महिलाएं अब नौकरियां कर रही हैं और भारत ने वहां विकास कार्यों और पुनर्निर्माण में भारी योगदान दिया है।

यह पूछे जाने पर कि  जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्य मंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि जब भारत तालिबान से बातचीत कर सकता है तो कश्मीर के हुर्रियत नेताओं से क्यों नहीं, जनरल रावत ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अंदरुनी मामला है और भारत और पाकिस्तान के बीच का दिवपक्षीय मुद्दा है। यहां किसी तीसरे पक्ष की कोई गुंजाइश नहीं है। जबतक वहां आतंकवाद जारी है उनके समर्थकों से कोई बात नहीं हो सकती। जनरल रावत ने सरकार का यह स्टैंड दुहराया कि आतंकवाद के साथ साथ बातचीत नहीं चल सकती।

वहां हमारे लोगों को बहकाया जा रहा है। जनरल रावत ने कहा कि जब हमारे काफिले पर हमला होता है तो हमें जवाब  देना ही होगा। यदि हमें यह गारंटी दी जाती है कि हम पर हमला नहीं होगा तब हम बातचीत के लिये आगे बढ़ने को तैयार हैं। वहां शांति दूसरे पक्ष के सहयोग के बिना नहीं आ सकती। थलसेना वहां यह सुनिश्चित करने के लिये तैनात है कि वहां जल्द से जल्द शांति स्थापित हो न कि वहां लोगों को मारने के लिये।

चीन सीमा पर चल रहे मौजूदा हालात के बारे में जनरल रावत ने कहा कि पिछले साल अप्रैल में चीन के वूहान शहर में हुई मोदी-शी शिखर बैठक से जो सद्भावना पैदा हुई वह इसका असर दिख रहा है।  हम वहां पर शांति व स्थिरता बनाए रखने में कामयाब हुए हैं। इस आशय के निर्देश दोनों सेनाओं को जारी हुए हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाख सीमा पर सीमा की अवधारणा को लेकर भारी मतभेद हैं। कहीं कहीं दस दस किलोमीटर तक दोनों सेनाएं एक दूसरे के इलाके में भूभाग को अपना मानते हैं। इसके बावजूद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हम चीनी सैनिकों को भांगड़ा करवाने में कामयाब हुए हैं।

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