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स्पेशल रिपोर्ट: मालदीव में भारत को सैन्य अड्डा नहीं

सुषमा स्वराज के साथ मालदीव के विदेश मंत्री  अब्दुल्ला शाहिद

नई दिल्ली।  मालदीव की नई सरकार ने  इन रिपोर्टों का खंडन किया है कि भारत से एक अरब डालर की वित्तीय सहायता के एवज में मालदीव अपने यहां भारत को  सैनिक अड्डा बनाने की मंजूरी देगा।





 मालदीव के विदेश मंत्रालय  ने एक ट्वीट संदेश में इन रिपोर्टों का खंडन करते हुए कहा कि इस आशय की रिपोर्ट  दुर्भावनापूर्ण और और आधारहीन हैं औऱ इसके पीछे मुख्य उद्देश्य नई सरकार की छवि को खराब करना है जो अपने सभी पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि मालदीव के नये राष्ट्रपति इब्राहीम सालेह का आगामी 17 दिसम्बर को भारत दौरे का ऐलान किया गया है।

रिपोर्टो में कहा गया था कि भारत के दौरे में मालदीव के विदेश मंत्री  अब्दुल्ला शाहिद ने भारत के साथ मजबूत सुरक्षा समबन्धों के लिये अपने एक द्वीप पर भारत का सैन्य अड्डा बनाने पर हामी भर दी है।  ट्वीटर  पर उन्होंने  कहा कि मालदीव में भारत को सैन्य अड्डा स्थापित करने देने की कोई सहमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को यह भरोसा दिलाना चाहेगी कि  वह राष्ट्रीय हितों के खिलाफ कभी भी कोई काम नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि नई सरकार मालदीव की सम्प्रुभता और आजादी से कभी भी कोई समझौता नहीं करेगी।

विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सभी पड़ोसी देशों औऱ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग का नजदीकी रिश्ता बनाए रखेगी। शाहिद ने कहा कि भारत मालदीव का सबसे नजदीकी और सबसे अधिक विश्वासी दोस्त है। उन्होंने चीन को भी अपना दोस्त बताया। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन ने मालदीव को मदद दी है जिससे मालदीव को फायदा हुआ है। गौरतलब है कि जिन दो हेलिकॉप्टरों को भारत को लौटाने का प्रस्ताव मालदीव की पूर्व सरकार ने किया था उनके बारे में मालदीव की नई सरकार ने साफ किया है कि भारत से भेंट में मिले दोनों हेलिकॉप्टर मालदीव के लोगों की सेवा करते रहेंगे।

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