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स्पेशल रिपोर्ट: मालाबार के बहाने सामरिक एकजुटता दिखाएंगे भारत, अमेरिका और जापान

मालाबार-युद्धाभ्यास

नई दिल्ली। हिंद और प्रशांत महासागर के इलाके में अपनी सामरिक एकजुटता दिखाने के लिये भारत, अमेरिका और जापान की नौसेनाओं के अग्रणी युद्धपोत अमेरिकी नौसैनिक अड्डा गुआम पहुंचने वाले हैं जो सात जून से अपना साझा अभ्यास का पहला चरण शुरू कर देंगे।





हिंद और प्रशांत महासागर में चीन द्वारा अपनी आक्रामक सैन्य मौजूदगी बनाने की कोशिशों के मद्देनजर अमेरिका, जापान और भारत की नौसेनाओं का यह त्रिपक्षीय मेजलोल जहां चीन के लिये एक संदेश है कि दोनों महासागरों में चीन द्वारा प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिशों का तीनों देश मिल कर मुकाबला करेंगे वहीं तीनों देश साझा नौसैनिक मेलजोल कर अपनी ताकत भी दिखाएंगे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि चीन इस साझा नौसैनिक प्रदर्शन से डर जाएगा? मालाबार साझा नौसैनिक अभ्यास के जरिये केवल एकजुटता ही दिखाना काफी होगा या दक्षिण चीन सागर के इलाके के द्वीपों पर चीन द्वारा अपनी सैन्य मौजूदगी गहरा करने को रोका जा सकता है या नहीं।

गत सप्ताह सिंगापुर में शांगरीला डायलॉग के मंच से अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने चीन को खुली धमकी और चेतावनी भी दी लेकिन क्या इससे चीन के सामरिक मंसूबों पर कोई फर्क पड़ेगा? दक्षिण चीन सागर में यदि चीन के बढ़ते सैन्य कदम को अभी नहीं रोका नहीं गया तो एक दिन ऐसा आएगा जब दक्षिण चीन सागर के विवादास्पद द्वीपों पर तो कब्जा होगा ही चीन कई ऐसे कृत्रिम द्वीपों का भी निर्माण कर लेगा जहां वह अपना नौसैनिक अड्डे स्थापित कर आसपास के समुद्री इलाकों पर अपना प्रादेशिक अधिकार जता सकेगा।

दक्षिण चीन सागर के इलाके से होकर भारत का आधा समुद्री व्यापार तो गुजरता ही है अमेरिका औऱ जापान के अलावा बाकी देशों के भी आर्थिक और सामरिक हित इस समुद्री इलाके को खुला रखने में हैं।

हालांकि मालाबार नौसैनिक अभ्यास का आयोजन 1992 से भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय स्तर पर होता रहा है लेकिन अब इसमें जापान को भी शामिल कर इसे त्रिपक्षीय बना कर इसकी सामरिक अहमियत में भारी इजाफा कर दिया गया है। इस साझा अभ्यास में भारत की ओर से देश में बना  स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस सह्याद्री,  पनडुब्बी नाशक भूमिका वाला कार्वेट कोमोर्ता , तेलवाहक जहाज आईएनएस शक्ति और समुद्र टोही विमान पी-8-आई को उतारा जाएगा जो इन दिनों गुआम पहुंचने के रास्ते में हैं। सबसे अहम बात यह है कि ये पोत दक्षिण चीन सागर से होकर ही गुआम नौसैनिक अड्डा तक पहुंचेंगे। ऐसा पहली बार होगा कि मालाबार नौसैनिक अभ्यास अमेरिकी नौसैनिक अड्डे के नजदीक हो रहा है।

इस अभ्यास में अमेरिकी नौसेना के निमित्ज वर्ग के विमानवाहक पोत रोनाल्ड रेगन,  तिकोनडेरोगा वर्गे के दो क्रूजर यूएसएस अंतियेतम और यूएसएस चांसलर्सविले,  अर्ले बुर्के वर्ग के विध्वंसक पोत बेनफोल्ड और मस्तिन,  लास एंजेल्स वर्ग की हमलावर पनडुब्बी और लम्बी दूरी के समुद्र टोही विमान पी-8-ए भाग लेंगे। जापान की ओर से इस अभ्यास में ह्यूगा वर्ग के हेलीकाप्टर करियर विमानवाहक पोत जे एस इसे और ताकानामी वर्ग के विध्वंसक पोत सुजुनामी और फुयुजुकी और जापानी समुद्री टोही विमान पी-1 के अलावा एक पनडुब्बी को भी उतारा गया है।

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