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स्पेशल रिपोर्ट: सेना में दांत औऱ पूंछ का अनुपात कम करने पर चर्चा शुरू

भारतीय सेना
भारतीय जवान (फाइल फोटो )

नई दिल्ली। सेना में दांत और पूंछ यानी लड़़ाकू सैनिकों और उनके सहायकों का अनुपात कम करने और अन्य मसलों पर विचार करने के लिये सेना के आला कमांडरों का सम्मेलन यहां नौ अक्टूबर को शुरू हुआ जो 15 अक्टूबर तक चलेगा।





सेना के कमांडरों के सम्मेलन में आपरेशनल औऱ अन्य प्रशासनिक मसलों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके अलावा भविष्य की चुनैौतियों का सामना करने के लिये किए गए अध्ययन की रिपोर्ट पर भी सेना के कमांडर अपने विचार साझा करेंगे

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक थलसेना के आपरेशनल औऱ सक्षमता के मसलों पर चार स्टडी ग्रुप बनाए गए हैं जिनकी रिपोर्टों पर चर्चा होनी है। सेना के संगठनात्मक ढांचे और सक्षमता को मजबूत करने के इरादे से सेना में सैनिकों औऱ उनके सहायकों की संख्या को कम करने पर कमांडर अपने विचार रख रहे हैं ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का बेहतर मुकाबला कर सकें। गौरतलब है कि सेना के अफसरों को सैन्य छावनियों में निजी कामों के लिये कई तरह के सहायक मुहैया कराए जाते हैं। ऐसे ही सैन्य कर्मियों की छंटनी कर उन्हें लड़ाकू भूमिका में तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि जनरल( रि.) जनरल डी बी शेकातकर की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई थी। इस समिति ने सेना की समाघात क्षमता बढ़ाने, रक्षा खर्च सतुलित करने और सशस्त्र सेनाओं के खर्चों पर अपनी रिपोर्ट दो साल पहले सौंपी थी। इसी समिति ने सेना में दांत और पूंछ यानी लड़ाकू सैनिकों और उनके सहायक सैनिकों का अनुपात कम करने के बारे में अपनी सिफारिश वाली रिपोर्ट सौंपी थी।

शेकातकर समिति ने सिगनल संस्थानों , सप्लाई औऱ परिवहन विभागों , शांति वाले सैन्य स्टेशनों, सैन्य फार्मों और सेना के डाक विभागों को बंद करने की सिफारिश की थी।

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