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Special Report: वायुसेना घटती स्क्वाड्रन संख्या से चिंतित, रूस से खरीदे जाएंगे 18 और सुखोई

सुखोई MKi
सुखोई- 30 एमकेआई

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना  लड़ाकू विमानों की घटती स्क्वाड्रन संख्या से चिंतित है और इस कमी को दूर करने के लिये उसने रूस से 18 अतिरिक्त सुखोई-30 एमकेआई विमानों की आपात खरीद का आग्रह रक्षा मंत्रालय से किया है।





इसलिये भारत ने  रूसी सुखोई कम्पनी से कहा है कि इसकी वायुसेना के लिये 18 और विमानों का एक अतिरिक्त स्क्वाड्रन बनाने  के लिये सहमति दे। गौरतलब है कि भारत में ही इन दिनों रूसी तकनीकी मदद से हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लि. में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों का उत्पादन हो रहा है। ऐसे करीब 222 लड़ाकू विमान भारत में बन रहे हैं जिसमें से करीब 140 वायुसेना को सौंपे जा चुके हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने इन मीडिया रिपोर्टों की पुष्टि की है कि भारतीय रक्षा मंत्रालय ने रूसी कम्पनी से कहा है कि भारत में ही अतिरिक्त 18 सुखोई- 30 एमकेआई विमानों को बनाने के  लिये जरूरी उपकरण मुहैया कराए।  सुखोई -30  विमान हिंदुस्तान ऐरोनाटिक्स लि. के नासिक कारखाने में बनाए जा रहे हैं।  18 अतिरिक्त सुखोई- 30 विमानों को भारत में बनवाने के लिये भारतीय वायुसेना को करीब 450 करोड़ रुपये प्रति विमान यानी कुल 5,850 करोड़ रुपये खर्च करने होगे।

यदि रूस भारत को 18 अतिरिक्त सुखोई-30 सप्लाई करने को तैयार होता है तो भारतीय वायुसेना के पास कुल 290 सुखोई -30 यानी 14 स्क्वाड्रन हो जाएंगे। पहले भारतीय वायुसेना के लिये 272 सुखोई- 30 विमान सप्लाई करने में सहयोग करने पर रूस ने सहमति दी थी।

गौरतलब है कि वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रनों की संख्या निरंतर गिरती जा रही है और इसमें इजाफा की जो योजना है उससे वायुसेना मुख्यालय संतुष्ट नहीं है इसलिये आपात खरीद के तहत वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय से कहा कि आपात खरीद के तहत रूस से 18 और सुखोई-30 विमानों की खऱीद करे। भारतीय वायुसेना के पास कुल 42 स्क्वाड्रन लड़ाकू विमान होने चाहिये लेकिन इनकी संख्या घट कर 30 पर आ गई है। पिछले साल जिन 110 लड़ाकू विमानों को सप्लाई करने का अंतरराष्ट्रीय टेंडर वायुसेना की ओऱ से निकाला गया था उनकी सप्लाई शुरू होने में  पांच छह  साल तक तक का वक्त लग सकता है।

सुखोई- 30 एमके आई लड़ाकू विमान एक बहुद्देश्यीय लड़ाकू विमान है जिससे हवा से जमीन पर मार करने वाली सुपरसोनिक क्रुज मिसाइल ब्रह्मोस भी तैनात करने की क्षमता हासिल कर ली गई है। यह विमान अपने  इलाके में उड़ते हुए दुश्मन के इलाके के भीतर 300 किलोमीटर भीतर तक झांक कर देख सकता है और अब इसमें ब्रह्मोस मिसाइल लगाने की क्षमता हासिल होने से यह विमान दुश्मन के काफी भीतर यानी 290 किलोमीटर तक किसी बड़े सैनिक या राजनीतिक ठिकाने को तहस नहस करने की क्षमता रखेगा।

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