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स्पेशल रिपोर्ट: हिंद महासागर का एक और बंदरगाह कब्जाने की तैयारी में है चीन

हिंद महासागर पर चाइना का नजर
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। पाकिस्तान के ग्वादार, श्रीलंका के हमबनटोटा, म्यांमार के क्योकप्यू बंदरगाह के बाद चीन अब हिंद महासागर के दूसरे छोर पर एक और बंदरगाह की सुविधा हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि इन बंदरगाहों का संचालन व्यापारिक इरादों से करने की बात की जाती है लेकिन वहां चीन अपनी नौसेना के पोतों के लिये विभिन्न सुविधाएं भी हासिल कर सकता है।





इसी इरादे से चीन ने अब हिंद महासागर के दूसरे छोर पर अफ्रीकी देश केन्या के मोम्बासा बंदरगाह को भी अपने हाथ में लेने की तैयारी कर रहा है। जैसे श्रीलंका के हमबनटोटा बंदरगाह को चीन ने 99 साल के लीज पर हासिल कर लिया उसी तरह केन्या द्वारा चीन को कर्ज भुगतान नहीं करने की स्थिति में वह मोमबासा बंदरगाह को भी अपने कब्जे में कर सकता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक केन्या रेलवे कॉरपोरेशन ने मोमबासा- नैरोबी रेलवे लाइन के लिये चीन के एक्जिम बैंक से 2.3 अरब डॉलर का कर्ज लिया था जो अब वह लौटाने की स्थिति में नहीं है। यह रेल लाइन चाइना रोड्स एंड ब्रिजेज कॉरपोरेशन द्वारा बनाई जा रही है। इस रेल लाइन के लिये कर्ज की शर्त यह थी कि यदि केन्या सरकार इसका भुगतान नहीं करेगी तो बंदरगाह की सम्पत्ति पर वह अपना अधिकार जता सकता है।

केन्या अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित है जहां केन्या का मुख्य बंदरगाह मोम्बासा स्थित है। यह बंदरगाह मोम्बासा चैनल औऱ बाब एल मंदेब जलडमरूमध्य के बीच सामरिक रुप से अहम जगह पर स्थित है। केन्या डाकू समस्या से ग्रस्त सोमालिया के नजदीक भी है। इसके पास में ही अदन की खाड़ी में स्थित जिबूती बंदरगाह पर भी चीन ने अपना सैनिक अड्डा स्थापित कर लिया है। चूंकि जिबूती पर पांच और देशों की सैनिक सुविधाएं हैं इसलिये वहां चीन की सैनिक गतिविधियों पर बाकी देश नजर रख सकते हैं।

लेकिन यदि मोमबासा बंदरगाह पर चीन का कब्जा हो जाता है तो वह चीन को पश्चिमी हिंद महासागर में पहुंच की सुविधा दे सकता है। मोमबासा पर चूंकि चीन का एकाधिकार होगा इसलिये वहां कोई और देश चीन की सैनिक गतिविधियों पर नजर नहीं रख सकेगा।

केन्या के साथ भारत के ऐतिहासिक और गहरे आर्थिक रिश्ते रहे हैं और वहां भारतीय मूल के लोग बहुतायत मे रहते हैं। केन्या के साथ भारत के सौहार्द्पूर्ण राजनीतिक रिश्ते रहे हैं। 2016 में वहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दौरा किया था और केन्याई राष्ट्रपति केन्याटा ने भी 2015 और 2017 में भारत का दौरा किया था लेकिन केन्या पर चीन के बढ़ते आर्थिक दबदबे की वजह से वह केन्या को भारत से दूर करने में कामयाब हो सकता है।

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