DEFENCE

स्पेशल रिपोर्टः पेरिस रक्षा प्रदर्शनी में ब्रह्मोस मिसाइल का जलवा, द.कोरिया और ब्राजील ने आयात में दिखाई रुचि

Paris-Def-Expo

नई दिल्ली। पेरिस में जून के तीसरे सप्ताह में आयोजित रक्षा प्रदर्शनी यूरोसेटरी में भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ने अपना जलवा दिखाया। इस दौरान कई और देशों के सैन्य प्रतिनिधिमंडलों ने इसकी क्षमता को सराहा और अपनी सेनाओं में ब्रह्मोस मिसाइल को शामिल करने में रुचि दिखाई।





हालांकि पेरिस में हर दो साल पर आयोजित होने वाली रक्षा प्रदर्शनी यूरोसेटरी में भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की हथियार कम्पनियों ने भी अपने स्टाल लगाए थे लेकिन भारत की ब्रह्मोस मिसाइल आकर्षण का मुख्य केन्द्र रही।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की शुरू में 290 किलोमीटर तक मार करने वाली किस्म का विकास किया गया था लेकिन बाद में इसकी मारक दूरी में काफी बढ़ोतरी की गई है। ब्रह्मोस मिसाइल की थलसैनिक और नौसैनिक किस्म के विकास के बाद लड़ाकू विमान से छोड़ी जाने वाली वायुसैनिक किस्म का भी विकास किया गया है जिसमें खासकर ब्राजील और दक्षिण कोरिया ने रुचि ली है। हालांकि वियतनाम की सेना ने भी ब्रह्मोस मिसाइल को हासिल करने के लिये भारत से कई बार अनुरोध किया है लेकिन राजनयिक वजहों से भारत ने वियतनाम को इसके निर्यात की हरी झंडी नहीं दी है। माना जा रहा है कि चीन की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत वियतनाम को अपनी ब्रह्मोस मिसाइल बेचने से कतरा रहा है।

पर, भारत ब्राजील और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के आग्रह पर गम्भीरता से विचार कर सकता है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का विकास भारत और रूस ने साझा तौर पर किया है। पेरिस यूरोसेटरी रक्षा प्रदर्शनी में भाग ले रही ब्रह्मोस की निर्माता कम्पनी ब्रह्मोस एरोस्पेस के अधिकारी ब्रह्मोस की कामयाबी से काफी संतुष्ट हैं। पेरिस में एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि कई सम्भावित खरीदार देशों के साथ उनकी अहम बातचीत हुई है। अघिकारी ने बताया कि पिछले साल ब्रह्मोस मिसाइल को सुखोई-30एमके-आई ल़ड़ाकू विमान से छोडने में मिली कामयाबी के बाद कई देशों ने ब्रह्मोस में रुचि ली है।

ब्रह्मोस के अलावा भारत की कई छोटी और मझोली रक्षा कम्पनियों ने भी पेरिस प्रदर्शनी में अपने रक्षा साज-सामान पेश किये। इन्हें भरोसा है कि इस प्रदर्शनी में भाग लेने से उनके उत्पादों के निर्यात की गुंजाइश बढ़ जाएगी। ब्रह्मोस मिसाइल को भारत की तीनों सेनाओ में पहले ही शामिल कर लिया गया है और यह मिसाइल भारत की सैन्य रणनीति का आधार बनेगी। फिलहाल यह मिसाइल आवाज से 2.8 गुना अधिक गति से जा सकती है लेकिन इन दिनों इसकी गति को बढ़ाकर आवाज से पांच गुना अधिक करने पर काम चल रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल की मौजूदा मारक दूरी 290 किलोमीटर को बढ़ाकर आठ सौ किलोमीटर तक भी करने का काम चल रहा है। इन क्षमताओं की वजह से ब्रह्मोस दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों में गिनी जाने लगी है।

Comments

Most Popular

To Top