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स्पेशल रिपोर्ट: चीन से सटी हवाई पट्टी पर अरुणाचल के लोग कर रहे हैं श्रमदान

वायुसेना की हवाई पट्टी

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक विजयनगर हवाई पट्टी की मरम्मत के लिये अरुणाचल के नागरिक श्रमदान कर रहे हैं। वायुसेना द्वारा इस हवाई पट्टी को अब फिर से बड़े विमानों को उड़ान भरने लायक बनाया जाएगा।





इस हवाई पट्टी को अडवांस्ड लैंडिगं ग्राउंड कहते हैं। पिछले तीन सालों से यह हवाई पट्टी बड़े विमानों के उड़ने लायक नहीं थी। चीन द्वारा तिब्बत के इलाके में हाल में कई नई वायुसैनिक सुविधाएं बनाने और वहां आधुनिक लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को तैनात करने के मद्देनजर रक्षा मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। हालांकि यहां सामरिक प्रेक्षकों का कहना है कि सन् 2016 के बाद इस हवाई पट्टी को मरम्मत के अभाव में बड़े विमानों के लिये उपयोग लायक नहीं रखना भारी चूक थी।

वायुसेना की हवाई पट्टी

अब भारतीय वायुसेना ने इस हवाई पट्टी की मरम्मत का काम शुरू किया है। चूंकि विजयनगर अडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड किसी मोटर वाहन चलाने लायक सड़क से जुड़ा नहीं है इसलिये सभी साज सामान औऱ कामगारों को हेलिकॉप्टरों से वहां भेजना पड़ता है। मरम्मत के काम के तहत हवाई पट्टी की सफाई है जहां घास उग गई है। इस काम में भारी संख्या में कामगारों की जरूरत थी इसलिये वहां के आसपास के 11 गांवों के लोगों ने हवाई पट्टी बनाने में सहयोग देने के लिये श्रमदान करने का फैसला किया ।

विशेषज्ञों की टीम द्वारा विजयनगर हवाई पट्टी की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है औऱ इसकी सामग्री को हेलिकॉप्टरों से भेजा जा रहा है। विजयनगर के पड़ोसी गावों के लोगों द्वारा किये जा रहे इस श्रमदान की वायुसेना ने भरपूर सराहना की है। इससे यह पता चलता है कि अरुणाचल प्रदेश के लोगों का वायुसेना और देश से किस तरह का लगाव है।

विजयनगर हवाई पट्टी सामरिक तौर पर अत्याधिक महत्वपूर्ण हवाई पट्टी है जहां वायुसेना अपने परिवहन विमानों को उतार कर सैनिक और साज सामान को आपात स्थिति में उतार सकती है।

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