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स्पेशल रिपोर्ट: चीन सीमा पर नजर रखने के लिये सेना को चाहिए ड्रोन

चीनी सैनिक
चीनी सीमा (सौजन्य- गूगल)

नई दिल्ली। चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान से लगे ऊंचे सीमांत इलाकों के पार सेना की गतिविधियों पर गहरी नजर रखने के इरादे से भारतीय थलसेना को ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले हाई अल्टीट्यू़ड ड्रोन हासिल करने की मंजूरी मिलने के बाद थलसेना ने देशी-विदेशी कम्पनियों को अपने ड्रोन के बारे में सूचना भेजने को कहा है।





थलसेना द्वारा जारी रिक्वेस्ट फार इनफार्मेशन (आरएफआई) में कहा गया है कि थलसेना को 75 अनमैन्ड एऱियल वेहीकल चाहिये। ये पायलट रहित यान सीमा पार दुश्मन की गतिविधियों पर निगाह रखने के काबिल होने चाहिये।

यहां सैन्य सूत्रों के मुताबिक इस तरह के ड्रोन हासिल करने के बाद चीन से लगी 4000 किलोमीटर लम्बी  वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी घुसपैठ औऱ अतिक्रमण पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। फिलहाल भारतीय सैनिकों को अपने सीमांत इलाके में किसी भी घुसपैठ को देखने के लिये गश्ती दल भेजने प़ड़ते हैं। यह गश्ती दल सीमांत इलाकों में पैदल जाता है और पहाड़ियों और जंगलों के बीच घुसपैठ पर नजर रखता है। लेकिन अब थलसेना ने तय किया है कि ड्रोन के युग में सीमाओं पर घुसपैठ रखने के लिये ड्रोनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।

थलसेना द्वारा जारी आरएफआई के मुताबिक यह ड्रोन ऐसा होना चाहिये जो 18  हजार फीट या पांच हजार मीटर की उंचाई पर उड़ान भर सके। ऐसे ड्रोन दो सैनिकों द्वारा संचालित करने लायक होने चाहिये और इन्हें किसी भी इलाके में आधे घंटे के भीतर उड़ाया जा सके। ये ड्रोन मैन पोर्टेबल ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम , रिमोट वीडियो टर्मिनल , दिन औऱ रात में संचालित होने वाले सेंसर पैकेज, टू वे एयरबार्न डेटा रिले सिस्टम होने चाहिये। इसमें एंटी जैमिंग औऱ एंटीस्पूफिंग टेकनालाजी भी होनी चाहिये।।इसमें मैप अपलोड करने की सुविधा भी होनी चाहिये। आऱएफआई का जवाब मिलने के बाद इनका अध्ययन कर रिक्वेस्ट फार प्रपोजल (आरएफपी) अगले साल अप्रैल तक जारी किया जा सकता है। निर्माता को यह प्रणाली 2020  तक सौंपनी होगी।

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