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स्पेशल रिपोर्ट: सेना दिवस पर पाक को मुंहतोड़ जवाब देने की सेना प्रमुख की चेतावनी

सेना दिवस पर सेना प्रमुख रावत

नई दिल्ली। विभिन्न सैन्य रेजिमेंटों के जवानों की आकर्षक परेड और विभिन्न किस्मों के हथियारों, टैंकों, एम- 777 औऱ के- 9 वज्र तोपों के अलावा आकाश मिसाइलों के प्रदर्शन के साथ भारतीय थलसेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए यहां 71वां सेना दिवस मनाया। इस मौके पर थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने जवानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि थलसेना जम्मू कश्मीर की नियंत्रण रेखा पर नैतिक दबाव बनाए हुए है और बनाए रखेगी। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि किसी भी घुसपैठ पर मुंहतोड़ कार्रवाई करेंगे। किसी भी तरह की हमलावर कार्रवाई का जवाब देने से हम पीछे नहीं हटेंगे।





जनरल रावत ने कहा कि दुश्मन आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है औऱ हम इसे कामयाब नहीं होने देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत प़ड़ने पर भारी कार्रवाई करने से नहीं हिचकेंगे। उन्होंने कहा कि हम सीमाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे।

जनरल रावत ने भारतीय वायुसेना औऱ नौसेना का आभार जाहिर करते हुए कहा कि हमारे ऑपरेशन और ट्रेनिंग में दोनों ने पूरा सहयोग प्रदान किया है। जनरल रावत ने कहा कि आज के दिन हम उन शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने अपने देश के लिये बलिदान दिया है।

जनरल रावत ने कहा कि मीडिया के जरिये वह जवानों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे बहुत अच्छी कार्रवाई कर रहे हैं और ऐसे ही करते रहिये। आने वाले दिनों में भी विजय आपकी ही होगी। नियंत्रण रेखा पर कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान को हुए नुकसान के बारे में पूछे जाने पर थलसेना प्रमुख ने कहा कि हर बात की पूरी जानकारी नहीं दी जा सकती। हमारे दुश्मन को भारी नुकसान होता है लेकिन हर कुछ को सबूत के तौर पर नहीं दिखाया जा सकता है। जब उन्हें नुकसान होता है तब वहां कोई वीडियो कैमरा नहीं होता।

सेना प्रमुख ने कहा कि हम आतंकवाद का सर कुचलने के लिये प्रतिबद्ध हैं। हमारा पड़ोसी आतंकी तंजीमों को हथियार मुहैया कराता है। उन्होंने अपने जवानों और अफसरों को भी आगाह किया कि हमारी विरोधी एजेंसियां हमेशा झूठी खबरें फैलाने की फिराक में रहती हैं। इसलिये सोशल मीडिया का प्रयोग करते समय सावधान रहने की हिदायत उन्होंने दी।

थलसेना दिवस के मौके पर तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सेना के पुरुष औऱ महिला जवानों और रिटायर्ड सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि आप सभी देश के गौरव हैं औऱ हमारी आजादी के प्रहरी हैं। यह जानते हुए कि हमारे जवान हमारी सीमाओं की रक्षा औऱ चौकसी में मुस्तैद हैं देश के नागरिक चैन की नींद सोते हैं।

सेना दिवस 15 जनवरी, 1949 से मनाया जाता है जब अंतिम ब्रिटिश सैन्य कमांडर चीफ सर फ्रांसिस बुचर ने अपनी कमान पहले भारतीय कमांडर इन चीफ जनरल करिअप्पा को सौंपी थी। सेना दिवस के इतिहास में पहली बार थलसेना की एक महिला अफसर लेफ्टिनेंट भावना कस्तुरी पुरुषों वाली आर्मी सर्विस कोर की टुकड़ी का नेतृत्व किया। इस सैन्य डुकड़ी में 144 पुरुष जवान शामिल थे। विगत में जनवरी, 2015 को एक महिला अफसर कैप्टन दिव्य अजीत ने केवल महिलाओं वाली सैन्य टुकड़ी की अगुवाई की थी।

कैंप्टन शिखा सुरभि

71वें सेना दिवस के मौके पर थलसेना की 33 महिला सदस्यों की ‘ऑल वुमन ड़ेयरडेविल’ टीम की अगुवाई कैप्टन शिखा सुरभी ने की।

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