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स्पेशल रिपोर्ट: चीन के खिलाफ अमेरिका का आरिया कानून, भारत को बताया साझेदार

पीएम मोदी और ट्रंप
फाइल फोटो

नई दिल्ली। हिदं प्रशांत समुद्री इलाके में शांति व सुरक्षा बनाए रखने और किसी एक देश की दादागिरी को रोकने के इरादे से तथा अमेरिकी सामरिक हितों की रक्षा के लिये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2018 के अंतिम दिन एक विधेयक आरिया- 2018 पर दस्तखत किए हैं जिसमें चीन को चुनौती और भारत को साझेदार बताया गया है।





आरिया- 2018 के तहत अमेरिका की नई  समर नीति की जो व्याख्या की गई है  उस पर अमल होने से अमेरिका औऱ चीन के बीच टकराव बढ़ेगा और चीनी प्रभुत्ववाद को चुनौती देने वाले भारत के साथ भी अमेरिका का सहयोग गहराएगा। अमेरिकी सुरक्षा हितों की रक्षा के लिये अमेरिका हिंद प्रशांत इलाके में समुचित सुरक्षा ढांचा खड़ा करने की बात आरिया में की गई है ताकि अमेरिकी सुरक्षा बलों को उकसाने वाली कार्रवाई का समुचित जवाब दिया जा सके। इस उद्देश्य से  इस इलाके में अमेरिकी सेनाएं जरूरी न्यूनतम शस्त्र भंडार जमा रखेंगी।

 आरिया- 2018 यानी एशियन रिएस्युरेंस इनीशियेटिव एक्ट ( ARIA)  अब भविष्य में हिंद प्रशांत इलाके के लिये अमेरिकी समर नीति का आधार बनेगा। इस नीति में भारत अमेरिका सामरिक साझेदारी को हिंद प्रशांत इलाके में शांति व सुरक्षा को बढ़ावा देने में भारत अमेरिका सामरिक साझेदारी को काफी अहम बताया गया है। अहम बात यह है कि इस समर नीति में भारत की साझेदारी को विशेष अहमियत दी गई है और चीन के बारे में कहा गया है कि उसके द्वारा नियम आधारित व्यवस्था  भंग करना चिंताजनक है। यह भी कहा गया है कि  नियम आधारित अंतरराषट्रीय व्यवस्था को  भंग करने के लिये चीन द्वारा की गई कार्रवाई के खिलाफ अमेरिका हमेशा आवाज उठाता रहेगा।

आरिया कानून में चीन के विद्रोही प्रांत ताइवान को चीन की बुरी नजर से बचाने के लिये हर सम्भव सुरक्षा मदद देते रहने का भी वायदा किया गया है जिससे चीन और अमेरिका के बीच आने वाले दिनों में तनाव  औऱ टकराव और बढ़ने की शंका है।

आरिया कानून में  भारत अमेरिका सामरिक साझेदारी के सेक्शन 104 में  भारत के साथ सामरिक साझेदारी के रिश्तों की विशेष व्याख्या की गई है औऱ दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र  में 2005 के बाद से अब तक हुए समझौतों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा गया है कि हिंद प्रशांत इलाके  में सुरक्षा  का माहौल बनाए ऱखने के लिये वह भारत, ऑस्ट्रेलिया औऱ जापान के साथ विशेष वार्ता कर रहा है।

चारों देशों के बीच चतुर्पक्षीय सुरक्षा वार्ता का अलग से जिक्र करते हुए आरिया कानून में कहा गया है कि इसका उद्देश्य नियम आधारित  व्यवस्था सुनिश्चित करना है, अंतरराष्ट्रीय कानून का आदर सुनिश्चित करना है  और एक स्वतंत्र और खुला हिंद प्रशांत इलाका बनाए रखना है।  चूंकि चीन पर ही  इस आशय का आरोप लगता रहा है इसलिये आरिया कानून चीन को सीधी चुनौती देने वाला कानून बन सकता है।

आरिया- 2018 दस्तावेज में  जनवरी, 2015 में भारत-अमेरिका के बीच सहमत उस संयुक्त सामरिक नजरिया का जिक्र किया गया है जिसमें हिंद प्रशांत औऱ हिंद महासागर इलाके में सुरक्षा बनाए रखने में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।  आरिया दस्तावेज में भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर का दर्जा दिये जाने की अहमियत बताई गई है। इसके तहत भारत को सैन्य प्रणालियों के  निर्यात को लाइसेंस मुक्त करने की बात कही गई है।

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