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स्पेशल रिपोर्ट: मालाबार अभ्यास किसके खिलाफ? तीन बड़ी ताकतें एकजुट

नई दिल्ली। प्रशांत और हिंद महासागरों में शांति व सुरक्षा सुनिश्चित करने के इरादे से भारत, अमेरिका और जापान का त्रिपक्षीय साझा नौसैनिक अभ्यास मालाबार सम्पन्न होने के बाद भारतीय य़ुद्धपोत अब स्वदेश लौटने लगे हैं। इस अभ्यास के दौरान तीनों देशों ने साझा नौसैनिक अभ्यास किया जिसमें हवाई सुरक्षा और पनडुब्बी युद्ध किया गया लेकिन उनका साझा दुश्मन कौन था जिसके खिलाफ तीनों देश एकजुट हो रहे हैं इसका खुलासा नहीं किया गया। लेकिन सामरिक हलकों में यह माना जा रहा है कि फिलीपीन के सागर में गुआम नौसैनिक अड्डे पर हुआ यह समुद्री युद्धाभ्यास दुश्मन समझे जाने वाले चीन को ध्यान में ही रखकर सम्पन्न हुआ।





प्रशांत सागर में चीन के आक्रामक होते तेवर के मद्देनजर तीनों बड़ी नौसैनिक ताकतों का एकजुट होकर काल्पनिक दुश्मन के खिलाफ युद्ध का अभ्यास करना काफी अहम है।

सात से 16 जून तक चले मालाबार अभ्यास के इरादों के बारे में अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने कहा कि भारत,  अमेरिका औऱ जापान के साझा सुरक्षा हित हैं जिनमें समुद्री सुरक्षा,  आतंकवाद,  मानवीय सहायता और आपदा राहत शामिल हैं। मालाबार के जरिये तीनों देशों ने शांति व सुरक्षा में अपना योगदान देने के लिये साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा कार्रवाई की। इस दौरान तीनों सेनाओं ने हवाई सुरक्षा अभ्यास किया यानी तीनों देशों के युद्धपोतों पर यदि आसमान से हमला होता है तो तीनों साथ मिल कर किस तरह अपने हवाई सुरक्षा तंत्र का तालमेल से इस्तेमाल करेंगे। इस दौरान समुद्री गश्त, टोही,  हेलीकाप्टर कार्रवाई, किसी संदिग्ध पोत का औचक निरीक्षण,  समुद्री युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई , मेडिकल सहायता के अभ्यास किये गए।

मालाबार-युद्धाभ्यास

अमेरिकी नौसेना के मुताबिक अभ्यास के दौरान उच्चस्तर का युद्ध कौशल साथ मिल कर पेश किया गया ताकि संकट के दौरान तीनों देश एक-दूसरे की युद्द रणनीति को समझ कर तालमेल से कार्रवाई करें। पर्यवेक्षकों का कहना है कि दक्षिण चीन सागर में चीन जिस तरह अपना नौसैनिक विस्तार करता जा रहा है उसके मद्देनजर  उस इलाके में चीनी प्रभुत्व रोकने के लिये तीनों देश एकजुट हो रहे हैं ताकि आने वाले दिनों में चीनी नौसेना भारत,  अमेरिका या जापान के व्यापारिक जहाजों के आवागमन में किसी तरह की बाधा नहीं पैदा करे। दक्षिण चीन सागर विश्व का सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्ग है और इस इलाके पर यदि किसी एक देश का प्रभुत्व स्थापित हुआ तो बाकी देशों के लिये अपनी व्यापारिक गतिविधियों को चलाना मुश्किल होगा।

दक्षिण चीन सागर से होकर भारत का आधे से अधिक व्यापार होता है इसलिये भारत के लिये यह काफी अहम है कि समान विचार और हित वाले दूसरे देशों के साथ मिल कर भारत अपनी सैन्य रणनीति बनाए ताकि भारत निर्बाध तरीके से अपने व्यापारिक पोतों की आवाजाही सुनिश्चित कर सके।

मालाबार नौसैनिक अभ्यास का यह 22 वां संस्करण था लेकिन पहली बार यह अभ्यास अमेरिकी नौसैनिक अड्डे के नजदीक के समुद्री इलाके में हुआ। 2015 से मालाबार अभ्यास में जापान भी भागीदार बनने लगा है।

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