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स्पेशल रिपोर्ट: सेना के खिलाफ मानवाधिकार हनन के 97 प्रतिशत आऱोप बेबुनियाद

भारतीय सेना के जवान
भारतीय जवान (फाइल फोटो )

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा मानवाधिकारों के हनन के आरोपों को यहां सेना के सूत्रों ने पूरी तरह पूर्वाग्रह और पक्षपात पूर्ण बताते हुए पिछले 24 साल के आंकड़े जारी किये हैं जिनसे पता चलता है कि सेना के खिलाफ लगाए गए 97 प्रतिशत से अधिक आरोप बेबुनियाद होते हैं और जानबूझ कर सेना को बदनाम और आतंकी तत्वों के खिलाफ सेना की कार्रवाई में बाधा डालने के इरादे से लगाए जाते हैं।





गौरतलब है कि हाल में संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद के प्रमुख ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारतीय सेना के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाए हैं। सैन्य सूत्रों का कहना है कि मानवाधिकार हनन के जो भी आरोप लगाए जाते हैं सेना उनका संज्ञान लेती है और उनकी समुचित जांच कर दोषी पाए गए लोगों को दंडित भी करती है ताकि उनके दूसरे सैन्य साथी इस सजा से सबक लें।

सूत्र ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सेना एक कम तीव्रता वाला युद्ध लड़ रही है जो पाकिस्तान द्वारा पूरी तरह समर्थित है और इन तत्वों से लड़ते हुए कुछ सहायक नुकसान होता है जिससे बचने की पूरी कोशिश सेना करती है।

कुल 1037 में से 991 आरोप झूठे पाए गए

सेना के एक सूत्र ने यहां पिछले 24 सालों के आंकड़े देते हुए बताया कि 1994 के बाद से जम्मू-कश्मीर में सेना के खिलाफ अब तक 1037 आरोप लगाए गए हैं जिसमें से केवल 31 आरोप ही सही पाए गए हैं। साफ है कि गत 24 सालों में 31 आरोप यानी औसतन सालाना एक ही सही आरोप सेना के खिलाफ साबित हुए हैं।

सेना के एक सूत्र के मुताबिक सेना के खिलाफ जो 1037 आरोप लगे उसमें से 1022 की गहन जांच करवाई गई और इसमें से फिलहाल 15 मामलों की ही जांच चल रही है। 1037 में से कुल 991 आरोप बेबुनियाद और झूठे पाए गए और केवल 31 आरोपों को ही सही पाया गया। इन सही पाए गए आरोपों में लिप्त पाए गए 70 सैन्य कर्मियों को दंडित किया गया और 18 मामलों में पीड़ित को समुचित मुआवजा भी दिया गया।

उत्तर पूर्वी राज्यो में 603 आरोपों की जांच, 572 आधारहीन

उत्तर पूर्वी राज्यो में भी सेना राष्ट्रविरोधी ताकतों से लड़ रही है और वहां भी सेना के खिलाफ मानवाधिकार हनन के आरोप लगाए जाते हैं। सूत्र के मुताबिक उत्तर पूर्वी राज्यों में पिछले 24 वर्षों में मानवाधिकार हनन के 627 आरोप लगे जिसमें से 603 की जांच करवाई गई। इनमें से 572 आरोप पूरी तरह आधारहीन पाए गए जबकि केवल 31 आरोप ही सही पाए गए। इनमें दोषी पाए गए 75 सैन्य कर्मियों को दंडित किया गया और 34 मामलों में पीडितों को मुआवजा भी दिया गया।

नियंत्रण रेखा पर इस वर्ष 17 जवान शहीद

सूत्र ने बताया कि सेना को निरंतर पाकिस्तान समर्थित आतंकी तत्वों से मुकाबला करना होता है। इस दौरान अपने सैनिकों का भी भारी नुकसान होता है। सेना एक कठिन हालात में आतंकी तत्वों का मुकाबला कर रही है। सूत्र के मुताबिक 2016 में जहां 35 आतंकी नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ करते मारे गए वहीं 2017 में यह संख्या बढ़कर 59 हो गई। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में 2016 में 115 आतंकी मारे गए और 2017 में 154 आतंकी मारे गए। 2016 के दौरान भारतीय सेना को नियंत्रण रेखा पर अपने 14  सैनिकों का नुकसान उठाना पड़ा जब कि भीतरी इलाकों में सेना के 49 जवान मारे गए। 2017 में नियंत्रण रेखा पर 18 औऱ इस साल 18 जुलाई तक 17 सैनिक मारे गए हैं। भीतरी इलाकों में भी 2016 के दौरान आतंकियों से लड़ते हुए सेना के 49 जवान नियंत्रण रेखा पर मरे जब कि 2017 में 44 मरे और इस साल अब तक 17जवान शहीद हो चुके हैं।

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