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चीन सीमा पर भी शहीद या घायल होने वाले जवानों को मिलेगी विशेष पेंशन

ITBP जवान
सीमा पर ITBP जवान (प्रतीकात्मक)

नई दिल्ली। डोकलाम तनातनी के आठ महीने बाद केंद्र सरकार ने विशेष पेंशन योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें चीन-भारत सीमा की रक्षा के दौरान अपनी जान गंवाने वाले या घायल होने वाले सशस्त्र बलों के कर्मियों को शामिल कर लिया है लेकिन पूर्व के प्रभाव से लागू करने की सेना की पुरानी मांग को स्वीकार नहीं किया है। एक अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक उदार पारिवारिक पेंशन पाकिस्तान के साथ लगी नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तैनात सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए ही लागू होती थी। इस पेंशन के अन्तर्गत अंतिम वेतन का 100 फीसदी दिया जाता है। सामान्य हालात में अंतिम वेतन का महज 30 फीसदी हिस्सा ही पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलता है।





रक्षा मंत्रालय की एक अधिसूचना के अनुसार पारिवारिक पेंशन योजना मार्च से लागू होगी। साथ ही कहा गया है कि अधिसूचना जारी होने के पहले निपटाए गए मामलों को फिर से खोला नहीं जाएगा। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने चीन के साथ करीब 4,000 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रक्षा करने वाले कर्मियों को उदार पारिवारिक पेंशन का लाभ प्रदान प्रदान करने के लिए 20 दिसंबर को सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सेना पूर्व के प्रभाव से, कम से कम पिछले वर्ष जून से इसे लागू करने पर जोर दे रही थी जब भारतीय और चीनी सेना के बीच डोकलाम में गतिरोध हुआ था।

उन्होंने कहा कि यह विशेष पारिवारिक पेंशन है और सशस्त्र बल मांग कर रहे थे कि चीन के साथ लगे बॉर्डर की रक्षा करने वालों को इसमें शामिल किया जाए।

रक्षक न्यूज की राय:

यह राहत देने और मनोबल बढ़ाने वाली खबर है कि चीन सीमा पर तैनाती के दौरान शहीद तथा घायल जवानों को विशिष्ट पारिवारिक पेंशन जाएगी। और अच्छा होता कि सरकार यह पेंशन पीछे की तारीख से देने की सेना की मांग मान लेती। पाकिस्तान की तरह भारत-चीन सीमा पर हालात सरहद की सुरक्षा से लेकर प्राकृतिक आपदा तक बेहद चुनौतीपूर्ण है। पेंशन के तहत अंतिम वेतन की 100 प्रतिशत दी जाने वाली धनराशि से बच्चों की शिक्षा, माता-पिता की सेवा तथा भरण-पोषण की कुछ हद तक बेहतर देखभाल हो सकेगी।

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