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दो फौजियों के दिल के प्रत्यारोपण में डाक्टरों और ट्रैफिक पुलिस ने किया कमाल

दिल का प्रत्यारोपण

नई दिल्ली/चेन्नई: देश और देशवासियों की सुरक्षा और उनके जीवन के लिए सिर्फ सेना के जवान ही नहीं समझौता करते बल्कि उनके परिजन भी कई तरह का समझौता करते हैं। कभी उन्हें सरहद पर भेजकर तो कभी उनकी शहादत देकर। और तो और ये जवान जब नहीं रहते हैं तो उनके परिजन उसके शरीर के कीमती अंगों से दूसरों को न सिर्फ जीवनदान देते हैं बल्कि मानते हैं कि उनका बेटा, पति या पिता अभी भी दुनिया में हैं….! ये जज्बा बेहद भावुक कर देने वाला है और रोमांचित करने वाला भी। यहाँ बात हो रही है दो ऐसे वीर जवानों की जो न होकर भी हैं। ये दो जवान हैं वायुसेना के कंचन लाल (नाम बदला हुआ) और भारतीय थल सेना के सचिन। दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके दिल आज भी धड़क रहे हैं।





वायुसैनिक के दिल से बची वृद्ध की जिंदगी

वायुसेना में नागरिक सेवा में लगे जवान कंचन लाल सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए थे और उन्हें आरआर आर्मी हॉस्पिटल दिल्ली में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। जहां बुधवार को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। कंचन लाल के परिजनों ने तुरंत उनके अंगदान करने का निर्णय लिया। इसकी जानकारी दिल्ली से 2184 किमी दूर चेन्नई में एक वृद्ध का उपचार कर रहे ग्लेनईगल ग्लोबल अस्पताल को मिली।

यहां एक वृद्ध के दिल की धड़कनें रुकने के कगार पर थी यानी अंतिम स्टेज थी। ऐसे में उसे हृदय की जरूरत थी। तो चेन्नई के चिकित्सकों ने दिल्ली में सम्पर्क किया। लेकिन उनके सामने 2184 किमी की दूरी चुनौती बनकर सामने आ गई। वजह थी ह्रदय को प्रत्यारोपित करने की समय सीमा, जो महज चार घंटे थी। दोनों शहरों के बीच की दूरी हवाई मार्ग से पूरी करने में 2 घंटे 40 मिनट लगते हैं। ऐसे में डॉक्टरों के पास मात्र 1 घंटा 20 मिनट ही था। उसमें भी दोनों राज्यों में सड़क मार्ग से भी दूरी तय करनी पड़ती। इस केस में समय का अभाव बहुत बड़ी चुनौती थी।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया

दिल का प्रत्यारोपण-दिल्ली

मामले की जानकारी दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को मिली। तुरंत ग्रीन कोरीडोर बनाया गया। आरआर अस्पताल से हवाई अड्डे तक यातायात का ऐसा बंदोबस्त किया गया कि ह्रदय ले जा रहे वाहन को रास्ते में क्षण भर भी रुकना न पड़े। साथ ही उस वाहन के साथ पुलिस का वाहन भी एस्कार्ट्स में था। रास्ते में तैनात सभी पुलिसकर्मियों को पहले ही अलर्ट कर दिया गया था। दोनों तरफ से वायरलेस सिस्टम पर पल-पल के मूवमेंट का आदान-प्रदान हो रहा था। ऐसे में रास्ता पहले ही साफ़ मिल रहा था। कुछ ही मिनटों में दिल एयरपोर्ट पहुंचा दिया गया। 4:12 बजे शाम को दिल्ली से जेट एयरवेज की फ्लाइट दिल लेकर 6.50 बजे डॉक्टरों की टीम चेन्नई एयरपोर्ट पहुंची।

दिल का प्रत्यारोपण

चेन्नई पहुंचने पर भी उन्हें ग्रीन कोरीडोर तैयार मिला यानी चेन्नई ट्रैफिक पुलिस भी हीरो बनकर उभरी। इसका लाभ यह हुआ कि करीब 18 किमी का फासला महज 36 मिनट में पूरा किया गया जबकि इतना फासला तय करने में पौना घंटा लग जाता है। यानि 7 बजकर 26 मिनट पर हार्ट को अस्पताल पहुंचा दिया गया। यहां वृद्ध का उपचार कर रहे डॉक्टरों की टीम ने बिना समय गंवाए उसके शरीर में दिल प्रत्यारोपित किया और वृद्ध फिलहाल स्वस्थ है।

अंग प्रत्यारोपण को संचालित करने वाली प्रमुख संस्था Transtan से एक डोनर की उपलब्धता का अलर्ट मिला

ग्लेनईगल ग्लोबल अस्पताल में Heart Failure and Transplant Program के निदेशक डॉक्टर संदीप अत्तावर ने बताया, ‘हमारे अस्पताल की प्रत्यारोपण समन्वय टीम को राज्य में अंग प्रत्यारोपण को संचालित करने वाली प्रमुख संस्था Transtan से एक डोनर की उपलब्धता का अलर्ट मिला। हमें डर सिर्फ दूरी का था। क्योंकि अंग निकालने के चार घंटे के अन्दर जरूरतमंद को दिल का प्रत्यारोपण हर हाल में कर दिया जाना चाहिए। दिल्ली और चेन्नई के बीच की औसत हवाई दूरी 2 घंटा 40 मिनट की है। लेकिन इस नेक काम के लिए विभिन्न सरकारी विभाग और अन्य लोग आगे आए और यह काम सफलतापूर्वक हो सका।’

दूसरा ताजा प्रसंग : फौजी सचिन का दिल हरमिंदर के शरीर में धड़क रहा है

सड़क दुर्घटना में ही घायल भारतीय थल सेना के जवान सचिन को भी ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। डॉक्टरों ने सचिन के पिता सुखपाल को उसकी जिंदगी की हकीकत की जानकारी दी और बताया कि वह सचिन को नहीं बचा पाएंगे। डॉक्टरों ने सुखपाल से सचिन के अंगदान करने की बात कही। सुखपाल के लिए इससे बुरी खबर और क्या हो सकती थी कि उनका बेटा अब इस दुनिया से विदा होने वाला है लेकिन उन्होंने हिम्मत से काम लिया और अपने बेटे के अंगदान करने का फैसला लिया।

फौजी सचिन के दिल का इंतजार झज्जर के रहने वाले हरमिंदर सिंह को था। वह जिंदगी और मौत से दिल्ली के राजेन्द्र प्लेस स्थित बीएलके सुपर स्पेशियलटी हॉस्पिटल में लड़ रहा था। 28 वर्षीय हरमिंदर कई दिनों से हॉस्पिटल में भर्ती थे और उन्हें 5 मार्च से अधिक दिक्कत थी।

दिल का प्रत्यारोपण-दिल्ली

फौजी सचिन के पिता सुखपाल से अंगदान की अनुमति मिलने के बाद आर्मी हॉस्पिटल और बीएलके सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के बीच 12.8 किमी का ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया और आधा घंटे से भी ज्यादा का फासला एम्बुलेंस ने महज 8 मिनट में पूरा किया। जहां डॉक्टरों ने 100 मिनट के अन्दर फौजी सचिन का दिल हरमिंदर सिंह के सीने में प्रत्यारोपित कर दिया।

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