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स्पेशल रिपोर्ट: सागर सुरक्षा अकेले नहीं हो सकती- एडमिरल लांबा

एडमिरल सुनील लांबा

नई दिल्ली।  नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा है कि हिंद महासागर का इलाका इतना बड़ा है कि कोई भी एक  देश अकेला इसकी सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर सकता। इसके लिये जरूरी है कि हम इसके हित धारक देशों के साथ मिल कर साझा प्रयास करें।





हिंद महासागर के तटीय देशों की नौसेनाओं के संगठन इंडियन ओसन नेवल सिम्पोजियम (आयंस) की स्थापना की दसवीं सालगिरह पर कोच्चि में  आयोजित  सदस्य देशों के नौसैनिक कमांडरों के  सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए  एडमिरल लांबा ने कहा कि इसी के अनुरूप भारत और भारतीय नौसेना ने अपने साझेदार देशों के साथ सहयोग को गहरा किया है ताकि एक सुरक्षित समुद्री माहौल विकसित किया जा सके। एडमिरल लांबा ने यह भी कहा कि हम आयंस की असीम सम्भावनाओं को भी मान्यता देते हैं ताकि इस इरादे से साझा समाधान पर काम हो सके।

एडमिरल लांबा ने कहा कि आयंस के सदस्य न केवल अपने राष्ट्रीय समुद्री इलाकों की सुरक्षा के लिये जिम्मेदार हैं बल्कि वे एक समान चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल आयंस द्वारा आयोजित सम्मेलन के वक्त बांग्लादेश के तट पर आयंस के सदस्य देशों का साझा नौसैनिक अभ्यास इमसारेक्स – १७ का आयोजन हुआ था। इस साल आयंस के लिये नौसेना प्रमुख ने मानव बचाव व राहत कार्यक्रमों के लिये एक साझा दिशा-निर्देश जारी किया था।  इस गाइडलाइंस को सही सत्यापित करने के लिये एक टेबल टॉप अभ्यास भी हुआ था। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये सदस्य देशों ने सूचना के आदान प्रदान की व्यवस्था की थी।

इसी भावना के अनुरुप भारतीय नौसेना जल्द  हिंद महासागर के इलाके के लिये  इनफार्मेशन फ्यूजन सेंटर को सक्रिय करने जा रही है। उन्होंने भरोसा जाहिर किया कि इस सेंटर की बदौलत समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

आयंस की स्थापना 2008 में भारतीय नौसना  की पहल पर हुई थी। अब हिद महासागर के करीब  32 देश इसके सदस्य बन चुके हैं। इसमें से २६ देश सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन का विचारणीय  विषय  सागर (सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फार ऑल इन द रीजन) है।

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