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खास रिपोर्ट: बोईंग का ‘मेक इन इंडिया’ के लिये संकल्प

C-17 ग्लोबमास्टर
C-17 ग्लोबमास्टर (सौजन्य- गुगल)

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे  बड़ी एरोस्पेस कम्पनी बोईंग भारत में रक्षा साज सामान के उत्पादन के लिये ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहन देगी। बोईंग अपने कई रक्षा उत्पादों के लिये पहले से ही कलपुर्जों औऱ उपकरणों का उत्पादन भारतीय कम्पनियों से करवा रही है।





चेन्नै में  आयोजित हो रहे डेफ एक्सपो-2018 के दौरान बोईंग भारत में अपना उत्पादन बढ़ाने के लिये मेक इन इंडिया को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाएगी। उल्लेखनीय है कि बोईंग और भारत का दशकों पुराना रिश्ता रहा है औऱ उसने भारतीय सेनाओं को C-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमान  और पी-8-आई जैसे समुद्री टोही विमानों की सप्लाई की है। अब भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप बोईंग भारत में ही भारतीय सेनाओं को सप्लाई किये जाने वाले उत्पादों का निर्माण करने का संकल्प लिया है। भारत के अंतरिक्ष वैमानिकी उद्योग को बढावा देने के लिये ही बोईंग ने हैदराबाद में अपने हमलावर अपाचे हेलिकॉप्टरों के  फ्यूजीलाज  बनाने का कारखाना लगाने के लिये टाटा कम्पनी के साथ पिछसे साल अनुबंध किया था जिसे टाटा बोईंग एरोस्पेस का नाम दिया गया  है।  बोईंग के भारत में करीब 12,00 कर्मचारी हैं। वह भारत से करीब 160 कम्पनियों से अपने कलपुर्जों आदि का आयात करती है।

अपाचे के अलावा बोईंग के हेवी लिफ्ट चिनूक हेलिकॉप्टरों के लिये भारतीय रक्षा मंत्रालय से सौदा हो चुका है  डे़फ एक्सपो- 2018 के दौरान बोइंग कम्पनी अपने उस ल़ड़ाकू विमान की भी नुमाइश करेगी जो भारतीय वायुसेना के लडाकू विमानों के टेंडर में भाग लेने वाली है। एफ-18  सुपर होरनेट नाम का यह विमान दो इंजनों वाला है।  इस विमान का सीमुलेटर भी  दर्शकों के लिये रखा गया है।  उल्लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना के  110  विमानों का टेंडर फिर निकाला है जिसमें बोईंग कम्पनी अपने सुपर होरनेट को  एक बार फिर उतारेगी।

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