DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: प्राइवेट सेक्टर ने भी युद्धपोत बनाना शुरू किया, L&T का पहला समुद्री गश्ती पोत कोस्ट गार्ड को सौंपा

नई दिल्ली। प्राइवेट सेक्टर द्वारा देश में बनाया गया पहला समुद्री गश्ती जहाज विक्रम भारतीय कोस्ट गार्ड को बुधवार को सौंपा गया। युद्धपोतों के निर्माण पर अब तक भारत के सरकारी शिपयार्डों का ही एकाधिकार रहा है लेकिन प्राइवेट सेक्टर ने भी इस बड़े प्रोजेक्ट में हाथ डालकर भारतीय समुद्री बलों को स्वदेशी क्षमता पर निर्भरता बढ़ाने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम रखा है। चेन्नै में चल रहे DEFEXPO 2018 के फोकस विषय मेक इन इंडिया के अनुरूप भारत के प्राइवेट सेक्टर ने अपनी इस अद्भुत क्षमता का परिचय दिया है। इस क्षमता को हासिल करने के बाद भारत के सरकारी शिपयार्डों पर युद्धपोतों को बनाने का दबाव कुछ कम होगा।





भारत की युद्धपोत क्षमता में नया आयाम

भारत की अग्रणी कम्पनी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी ) ने आफशोर पेट्रोल वेसेल वर्ग के इस युद्धपोत को कोस्ट गार्ड को सौंप पर भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमता में नया आयाम जोड़ा है। चेन्नै के निकट कट्टुपल्ली में रक्षा राज्य मंत्री डा. सुभाष भामरे की मौजूदगी में यह पोत कोस्ट गार्ड को सौंपा गया। इस मौके पर कोस्ट गार्ड के महानिदेशक राजेन्द्र सिंह, इंस्पेक्टर जनरल राजन बार्गोतरा और अन्य आला अधिकारियों के अलावा लार्सन एंड टूब्रो के प्रबंध निदेशक औऱ सीईओ एस एन सुब्रह्मण्यम आदि मौजूद थे।

महज 25 महीने के रिकार्ड समय में हुआ निर्माण

आईसीजीएस विक्रम नाम के इस युद्धपोत को महज 25 महीने के रिकार्ड समय में बना कर प्राइवेट सेक्टर ने इस तरह के समुद्री गश्ती पोत को बनाने में अपनी महारत दिखाई है। इस पोत के निर्माण कार्य की आधारशिला यानी इसकी कील मार्च, 2016 में रखी गई थी। इस पोत को कोस्ट गार्ड में कमीशन करने के बाद एलएंडटी के प्रबंध निदेशक सुब्रह्मण्यम ने कहा कि यदि इसी तरह के मौके मिलते रहे तो एलएंडटी युद्धपोतों को तयशुदा वक्त के भीतर बनाने की क्षमता दिखाते हुए भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड की जरूरतों को पूरा कर सकता है।

भारत के पोत निर्माण के छह दशकों के इतिहास में एलएंडटी ने कई उपलब्धियां हासिल कीं जिनमें पहली बार कहा जा सकता है. किसी प्राइवेट सेक्टर शिपयार्ड द्वारा युद्धपोत का पहली बार पूरी तरह डिजाइन और निर्माण देश में ही एलएंडटी के इंजीनियरों और डिजाइनरों द्वारा किया गया है।

मार्च, 2015 में एलएंडटी को दिया था आर्डर

रक्षा मंत्रालय ने मार्च, 2015 में एलएंडटी को इस वर्ग के सात आफशोर पेट्रोल वेसेल बनाने के आर्डर दिये थे। एलएंडटी को कोस्ट गार्ड के लिये इंटरसेप्टर बोट्स भी बनाने का आडर्र मिला है। एलएंडटी को ऐसे 54 इंटरसेप्टर बोट बनाने के आर्डर मिले थे जिसमें से 38 बोट सौंप दिये हैं। युद्धपोतों को बनाने के लिये एलएंडटी ने विश्व स्तर की नवीनतम ढांचागत सुविधा स्थापित की है।

हेलीकॉप्टर भी किए जा सकते हैं तैनात

आईसीजीएस विक्रम लम्बी दूरी तक समुद्र में विचरण करने वाला पोत है जिस पर हेलीकॉप्टर भी तैनात किये जा सकते हैं। ये पोत भारत के द्वीपीय भूभागों की भी चौकसी के अलावा समुद्री डाकुओं और तस्करों पर भी नजर रख सकते हैं। 2140 टन विस्थापन क्षमता वाला यह पोत 97 मीटर लम्बा और 15 मीटर चौड़ा है और पांच हजार समुद्री मील का सफर कर सकते हैं। इस पोत के डिजाइन को अमेरिकन ब्यूरो आफ शिपिंग के अलावा इंडियन रजिस्ट्रार आफ शिपिंग ने प्रमाणित किया है।

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