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परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद के पुत्र को नहीं मिल पा रहा बेहतर इलाज

अब्दुल हमीद की पत्नी और बेटा हसन अली

कानपुर। परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद के पुत्र हसन अली बेहतर इलाज के लिए तरस रहे हैं। खास बात यह है कि वह यहां कि एक ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से सेवानिवृत हैं और केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के हकदार भी हैं। पर नियम कानूनों की अड़चनों की वजह से वह बेहतर इलाज पाने से वंचित हैं।





एक अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक हसन अली शास्त्री नगर स्थित अपने आवास में सपरिवार रहते हैं। वह ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से सेवानिवृत हैं। गत 20 मई की शाम करीब 07 बजे के आसपास सड़क दुर्घटना में उनका पैर टूट गया था। इलाज के लिए उन्होंने CGHS का सहारा लिया। पर नियम के अनुसार वह अस्पताल में लगातार केवल चार दिन ही भर्ती रह सकते हैं। फिलहाल उनके दाहिने पैर का इलाज शहर के एक निजी नर्सिंग होम में चल रहा है।

बेटे की गंभीर व चिंताजनक हालत की खबर पाकर वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी शुक्रवार को अस्पताल पहुंचीं और बेटे की हालत देखकर भावुक हो गईं। 10 दिन बाद भी हसन अली की तबीयत में अपेक्षाजनक सुधार नहीं है। गौरतलब है कि सन् 1965 में भारत-पाक युद्ध में वीर अब्दुल हमीद ने अपनी साधारण सी गन माउंनटेड जीप से पाकिस्तानी पैंटन टैंकों को धूल चटा दी थी।

रक्षक न्यूज की राय:

देश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े नियम-कायदे ऐसे हैं कि जरूरतमंद लोगों को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसा अक्सर ही देखने में आता है। पर देश सेवा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले या समर्पित जवानों, उनके आश्रितों के साथ ऐसा होने पर, मीडिया में चर्चित होने पर खबरें बनती हैं। ऐसे मामलों पर सरकार तथा स्वास्थ्य एजेंसियों को पुनर्विचार करने की जरूरत है।

 

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