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जन्मदिन विशेष: प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा ! शूरवीरता की एक एेतिहासिक मिसाल

मेजर सोमनाथ शर्मा ! एक ऐसा नाम जो रणभूमि में शूरवीरता का ऐसा इतिहास लिख गया कि उनके कारनामे नई पीढ़ी में जोश और कुरबानी का जज्बा जगाने के लिए काफी हैं। मेजर सोमनाथ शर्मा के आखिरी लफ्ज थे, ‘..दुश्मन हमारे से सिर्फ 50 गज के फासले पर है। हमारी तादाद न के बराबर है। हम जबरदस्त गोलाबारी से घिरे हैं। मगर मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा जब तक हमारे पास आखिरी गोली और आखिरी फौजी है।





विरासत में मिला था फौजी जज्बा

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में 31 जनवरी 1923 को जन्मे सोमनाथ को फौजी जज्बा तो विरासत में ही मिला था। पिता मेजर जनरल अमरनाथ शर्मा और अंकल कैप्टन डी वासुदेव की छाया में पले-बढ़े सोमनाथ शर्मा ने फौज में जाने का सपना तो बचपन में ही पाल लिया था। नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से पढ़ाई के बाद देहरादून के प्रिंस ऑफ वेल्स मिलिट्री कॉलेज में दाखिला और फिर रॉयल मिलिट्री कालेज में पढ़ाई पूरी की । 

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