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नौसेना का ट्रेनिंग शिप तरंगिनी सात महीने बाद लौटा

नई दिल्ली। नौसेना का प्रशिक्षण पोत आईएनएस तरंगिनी सात महीनों तक महासागरों के चक्कर काटने के बाद अपने नौसैनिक अड्डे कोच्चि पर 30 अक्टूबर को लौट आया। तरंगिनी की भव्य अगवानी की गई और इसके लिये दक्षिणी नौसैनिक कमांड के चीफ आफ स्टाफ रियर एडमिरल आर जे नाडकर्णी मौजूद थे।





तरंगिनी के आगमन पर दक्षिणी नौसैनिक कमांड द्वारा साउथ जेटी पर एक स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर दक्षिणी नौसैनिक कमांड के अफसर, जवान और उनके परिवारजन मौजूद थे।  इस अभियान का नाम लोकायन– 18 रखा गया था। गत 18 अप्रैल को इसे हरी झंडी दिखाकर विदा किया गया था। इस पोत ने 13 देशों के 15 बंदरगाहों पर भारत का ध्वज लहराया। तरंगिनी ने अरब सागर, लाल सागर,  स्वेज नहर, भूम्ध्य सागर, Strait of Gibraltar, उत्तरी अटलांटिक सागर, बिस्के की खाड़ी, इंगलिश चैनल और उत्तरी सागर को पार किया और नार्वे तक पहुंचा जहां से तरंगिनी ने स्वदेश लौटना शुरु किया।

तरंगिनी ने फ्रांस के बोर्दे में थ्री फेस्टिवल टाल शिप रेगाटा में भाग लिया। बाद में ब्रिटेन में भी इसी तरह के कार्यक्रम में इस पोत ने भाग लिया। तरंगिनी ने दो सौ टाल शिपों के साथ सागर में नौवहन किया। आईएनएस तरंगिनी भारतीय नौसेना का पहला सेल ट्रेनिंग शिप है। इसे 11 नवम्बर,1997  को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था। 21  बरसों के अपने सेवाकाल में इस पोत ने विश्व के सागरों में 2,20,000  समुद्री मील का भ्रमण किया। इस पोत के कमांडर राहुल मेहता हैं। इस पर नौ अफसर और 43  नौसैनिक सवार रहते हैं। इस पर 30  अफसर ट्रेनी कैडेटों को भी सवार किया जा सकता है। इस पोत की प्राथमिक भूमिका नौसेना के अफसर कैडेटों में साहस, भाईचारा, चरित्र औऱ पेशेवर गुण भरना है। 2003-04  के दौरान इस पोत ने पृथ्वी के चक्कर काटे थे।

 

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