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भविष्य की ताकत बनेंगे नौसैनिक रहित व्हीकल, जानें 9 खास बातें

इंसान जमीन पर रहने के लिए बना है, इसलिए उसका सागर में विचरण करना हमेशा जोखिम भरा माना जाता रहा है। दरअसल पानी के भीतर ऑक्सीजन की कमी इंसान को डराती रही है। सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं पानी के भीतर और भी कई तरह की चुनौतियां रहती हैं। लेकिन, इंसान के जज्बे और तकनीक के विकास ने तमाम चुनौतियों को बौना साबित कर दिखाया है। जहाज और पनडुब्बी का विकास कर इनसान समुद्र की तलहटी के कई रहस्यों से पर्दा उठाने में कामयाब रहा है। जिस रफ्तार से तकनीक का विकास हो रहा है उसने जोखिम और भी कम कर दिया है। आज स्थिति यह है कि कई देश मानवरहित जहाज और पनडुब्बी विकसित कर चुके हैं। यानी ऐसे जहाज और पनडुब्बी जो समुद्र की गहराइयों को तो नापेंगे लेकिन उन पर किसी इनसान की जरूरत नहीं होगी। आज हम आपको मानवरहित जहाज और पनडुब्बी यानी Remotely Operated Underwater Vehicle (ROV) के बारे में चंद बातें बता रहे हैं-





क्या है ROV

जब कोई पानी में 100 मीटर नीचे जाता है तो उसे सामान्य वातावरण के मुकाबले 10 गुना अधिक दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शरीर में कई रासायनिक और शारीरिक बदलाव आने लगते हैं। किसी भी गोताखोर के लिए सामान्य काम करने की गहराई 150 मीटर तय की गई है। इन्हीं सब चुनौतियों के मद्देनजर 20वीं सदी के अंत में कई प्रकार की टैक्नोलाजी विकसित हुई और इनकी मदद से रिमोटली ओपरेटेड व्हीकल ROV का विकास हुआ। ROV एक ऐसे मानवरहित पनडुब्बी या जहाज होते हैं  है जिन्हें दूर से नियंत्रित किया जा सके और जो मानवयुक्त पोत पनडुब्बी की ही तरह जोखिम भरे काम कर सकें। इस तरह ROV की मदद से भनक लगने से पहले ही दुश्मन को गहरी चोट पहुंचाई जा सकती है।

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