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टीयू-142 एम एयरक्राफ्ट की विदाई का वो भावुक लम्हा…

नई दिल्ली: आईएनएस विराट के बाद आज(29 मार्च) एक और शानदार अध्याय का अंत हो गया। भारतीय नौसेना का सबमरीन एयरक्राफ्ट टीयू-142 एम ने भी नौसेना का अलविदा कह दिया। 49.5 मीटर लंबे इस एयरक्राफ्ट का उपयोग नौसेना पिछले 30 साल से कर रही थी। एयरक्राफ्ट टीयू-142 एम ने आज आखिरी उड़ान भरी और जब जमीन पर उतरा तो इसे नौसेना ने आखिरी सलामी के तौर पर जो सम्मान दिया वो देखने लायक था। जिसमें एयरक्राफ्ट को दो तरफ से  दो टैंकरों से पानी की बौछार की गई ये विदाई का वो आखिरी लम्हा था जिससे नौसेना करीब 30 साल तक जुड़ी रही और विदाई का ये नजारा काफी भावुक था।





टीयू 142 एम की उत्कृष्ट सेवा के सम्मान में आईएनएस राजाली पर नौसेना अध्यक्ष द्वारा एक टीयू स्टैटिक डिस्प्ले एयरक्राफ्ट का भी उद्घाटन किया गया।

टीयू-142 एम दुनिया का सबसे तेज रफ्तार वाला टर्बोप्रोप एयरक्राफ्ट था। यह एयरक्राफ्ट फोटोग्राफिक और रेडियो टोहना मिशन में भी हिस्सा ले चुका है। दुनिया के अधिकांश फाइटर प्लेन के लिए भी इसका मुकाबला करना मुश्किल था। यह पिछले 30 साल से नौसैनिक ऑपरेशन को अंजाम देता रहा था। इसे नौसेना का ‘आई इन द स्काई’ यानि ‘आसमान में नौसेना की आंख’ कहा जाता था।

भारतीय नौसेना ने टीयू-142 एम एयरक्राफ्ट का 2006-10 में आधुनिकीकरण किया। इसे बोइंग पी 8-I से रिप्लेस किया जा चुका है। पी 8-I केएच-35 एंटी शिप मिसाइल, स्वचालित मिसाइल, टारपीडोस जैसे हथियार लेकर उड़ान भरने में सक्षम है। भारतीय नौसेना और आंध्र प्रदेश सरकार ने टीयू-142एम को म्यूजियम बनाने का फैसला किया है।

Boeing P 8 I

 

टीयू 142 एम लांग रेंज मैरीटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट 1998 में पूर्ववर्ती सोवियत संघ से खरीदा गया था और डबोलिम गोवा में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। बाद में 1992 में इसका बेस स्थाई रूप से आईएनएस राजाली को बना दिया गया था और यह भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा एलआरएमआर एएसडब्ल्यू बन गया था। इस विमान ने सभी बड़े नौसैनिक अभ्यासों और कार्रवाईयों में हिस्सा लेते हुए भारतीय नौसेना का गौरव बढ़ाया। अपनी आखिरी अवस्था में होने के बावजूद इस विमान ने मार्च, 2017 में ट्रापेक्स नौसेना अभ्यास में असाधारण प्रदर्शन किया।

अन्य महत्वपूर्ण समारोह आईएनएस राजाली की रजत जयंती से संबंधित होगा, जो पिछले 29 वर्षों से टीयू का पर्याय बना हुआ है और उसके लिए आश्रय स्थल रहा है। टीयू 142 एम की भूमिका अब पी-8-I एयरक्राफ्ट निभाएगा, जो हाल ही में नौसेना में शामिल किया गया है। पी-8-I एयरक्राफ्ट की सभी प्रणालियां प्रमाणित सिद्ध हुई हैं और इसे भारतीय नौसेना के आप्रेशनल ग्रिड में एकीकृत किया जा चुका है।

टीयू 142 एम एयरक्राफ्ट के पिछले स्क्वाड्रन कमांडिंग आफिसर कमांडर योगेंद्र मैर, कमांडर वी. रंगनाथन को कमान सौंपेंगे, जो पी-8-I के प्रथम स्क्वाड्रन कमांडिंग ऑफिसर होंगे।

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