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एक चुनौती भरे अभियान से जुड़ी 9 खास बातें

भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब नौसेना की छह महिला अधिकारी एक समुद्री सफ़र के जरिए विश्व की परिक्रमा करेंगी। इस टीम का ये सफ़र गोवा से केपटाउन तक होगा। इसे पूरा करने में सात महीने लगेंगे। आइये आपको बताते हैं इस अभियान से जुड़ी कुछ खास बातें :





सेलिंग बोट से करेंगी विश्व परिक्रमा

 

‘नाविका सागर परिक्रमा’ एक ऐसा अभियान है, जिसमें भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों की एक टीम भारत निर्मित सेलिंग बोट आईएनएसवी तारिणी पर सवार होकर विश्व की परिक्रमा करेंगी।

एक महत्वपूर्ण कदम

यह परिक्रमा भारत सरकार की नारी शक्ति पर बल देने की नीति को परिलक्षित करती है। नौसेना में महासागर में नौकायन की गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सबसे पहले इन्होंने की थी सागर परिक्रमा

इससे पहले एकल सागर परिक्रमा नेवी की (सेवा निवृत्त) ने 19 मई 2009 से 19 अगस्त 2009 तक आई एनएसवी महादेई पर सवार होकर की थी। इसके अलावा सबसे पहली नॉन स्टॉप एकल परिक्रमा कमांडर अभिलाष टॉमी केसी द्वारा 1 नवंबर 2012 से 31 मार्च 2013 तक की गई थी।

इस अभियान में शामिल हैं ये छह महिला अधिकारी

आईएनएसवी तारिणी के चालक दल में जो महिला अधिकारी शामिल हैं। उनमें लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी (उत्तराखंड), लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल (हिमाचल प्रदेश), लेफ्टिनेंट कमांडर स्वाति पी (आंध्रप्रदेश), लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या बोडापति(तेलांगना), लेफ्टिनेंट एसएच विजया देवी (मणिपुर), लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता(उत्तराखंड) हैं।

टीम को दिया गया है विशेष प्रशिक्षण

 

इस पूरे महिला चालक दल को इस समुद्री यात्रा अभियान के लिए व्यापक प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण में इलेक्ट्रोनिक कम्युनिकेशन भी शामिल है। प्रशिक्षण के तहत आईएनएसवी महादेई और तारिणी पर लगभग 20,000 समुद्री मील नौकायन किया है जिसमें मॉरिशस तक दो अभियान(2016 और 2017 में) तथा दिसंबर 2016 में गोवा से केपटाउन तक की समुद्री यात्रा शामिल है।

इस नौका पर सवार होकर करेंगी परिक्रमा

 

आईएनएसवी तारिणी 55 फुट लम्बी सेलिंग बोट (पाल नौका) है, जिसका निर्माण मैसर्स एक्वेरियस शिपयार्ड प्रा. लिमिटेड गोवा ने किया है। तारिणी को भारतीय नौसेना में 18 फरवरी 2017 को शामिल किया गया। यह बोट अब तक 8,000 समुद्री मील का सफर तय कर चुकी है।

दक्षिण महासागर का पहला दौरा

 

ऐसा पहली बार है कि भारतीय नौसेना की टीम सेल बोट लेकर दक्षिण महासागर में जा रही है। टीम की कप्तान वर्तिका जोशी के अनुसार ‘समुद्र नहीं जानता कि आप महिला हैं या पुरुष। एक अच्छा सेलर होना ज्यादा मायने रखता है।’

चुनौती भरा अभियान

नौसेना की यह बोट जीपीआर सिस्टम से लैस है लेकिन राशन व पानी की मात्रा सीमित ही है। यह अभियान कितना चुनौती भरा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि समंदर में यदि नौका एक हजार नॉटिकल माइल्स की दूरी पर है तो हेलिकॉप्टर का भी मदद के लिए पहुंच पाना मुश्किल होता है ऐसे में किसी खतरे से भी टीम को खुद ही निपटना होगा।

पांच चरणों में समाप्त होगी यात्रा

सागर परिक्रमा पांच चरणों में पूरी होगी। इस दौरान राशन और आवश्यक मरम्मत के लिए चार बंदरगाहों पर रुकेगी। इनमें फ्रेमेंटल (ऑस्ट्रेलिया), लाइटलटन (न्यूजीलैंड), पोर्ट स्टेनली (फ़ॉकलैंड्स) और केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) शामिल हैं।

यह होगा अभियान का उद्देश्य

इस अभियान को ‘नाविका सागर परिक्रमा’ नाम दिया गया है क्योंकि इसका लक्ष्य देश में महिला सशक्तिकरण तथा नौसेना में महासागर में नौकायन की गतिविधियों को बढ़ावा देना है। नारी शक्ति, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन, मेक इन इंडिया, मौसम, महासागर, वेव डेटा आब्जर्वेशन, समुद्री प्रदूषण, स्थानीय संवाद आदि इस अभियान के अतिरिक्त लक्ष्य हैं।

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