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स्पेशल रिपोर्ट: नए नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह अब संभालेंगे समुद्री हितों की अहम जिम्मेदारी

करमबीर सिंह

नई दिल्ली। एडमिरल करमबीर सिंह 31 मई को भारत के 24वें नौसेना प्रमुख के तौर पर अपना दायित्व सम्भालेंगे। एडमिरल सुनील लांबा के नौसेना में चार दशक कार्यभार के बाद सेवानिवृत्त होंगे, जिसके बाद एडमिरल करमबीर सिंह भारतीय समुद्री हितों की रक्षा की जिम्मेदारी सम्भालेंगे।





एडमिरल करमबीर सिंह भारतीय नौसेना के पहले हेलिकॉप्टर पायलट होंगे जिन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। जालंधर के निवासी एडमिरल सिंह ने देश के कई हिस्सों में अपनी स्कूली शिक्षा ग्रहण की। उनके पिता भारतीय वायुसेना में सेवारत  रहे हैं।

हालांकि एडमिरल सिंह नौसेना प्रमुख के तौर पर अपना दायित्व सम्भाल लेंगे लेकिन इस पद पर उनकी नियुक्ति को  चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई भी जारी है।  एडमिरल सिंह का इस पद पर बने रहना याचिका की सुनवाई के नतीजों पर निर्भर होगा। एडमिरल सिंह की नियुक्ति को वाइस एडमिरल बिमल वर्मा ने चुनौती दी  है जो नौसेना में सबसे सीनियर वाइस  एडमिरल होने का दावा कर रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने नौसेना प्रमुख के तौर पर नियुक्त होने का दावा किया है।

एडमिरल करमबीर सिंह भारतीय नौसेना में साल 1982 में हेलिकॉप्टर पायलट के तौर पर भर्ती हुए थे जिन्होंने चेतक और कामोव हेलिकॉप्टरों को विभिन्न भूमिकाओं में उड़ाया है। 39 सालों के अपने सेवा काल में एडमिरल सिंह ने कोस्ट गार्ड के पोत चांदबीवी, नौसेना के कार्वेट युद्धक पोत आईएनएस विजयदुर्ग की कमान सम्भाली है।  एडमिरल सिंह ने नौसेना मुख्यालय में भी विभिन्न अहम दायित्व सम्भाले हैं।

नौसेना प्रमुख बनाए जाने के पहले एडमिरल सिंह पूर्वी नौसैनिक कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ रहे हैं। वह तीनों सेनाओं की साझा अंडमान एवं निकोबार कमांड भी सम्भाल चुके हैं। वह महाराष्ट्र और गुजरात क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग भी रह चुके हैं। एडमिरल सिंह राष्ट्रपति द्वारा परम विशिष्ट सेवा पदक और अति विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किये जा चुके हैं।

 नौसेना प्रमुख के पद से  शुक्रवार को रिटायर कर रहे एडमिरल सुनील लांबा ने अपने  चार दशकों के सेवा काल में भारतीय नौसेना के आपरेशनल, ट्रेनिंग और संगठनात्मक दर्शन में कई बदलाव किये हैं।  एडमिरल लांबा पूर्वी नौसैनिक कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं। एडमिरल लांबा के कार्यकाल में विभिन्न किस्मों के युद्धपोतों की समाघात तैयारी को बेहतर सक्षमता के साथ  युद्ध के लिये तैयार अवस्था में रखा गया।

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