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Special Report: समुद्री आतंकवाद के खिलाफ भारत-फ्रांस के बीच नौसैनिक सहयोग

युद्धाभ्यास वरुण- 2019

नई दिल्ली। भारत और फ्रांस समुद्री आतंकवाद का मुकाबला करने के लिये आपसी समुद्री सहयोग कर रहे है। भारत और फ्रांस के बीच गोवा  के तट पर इन दिनों चल रहे साझा ‘युद्धाभ्यास वरुण- 2019’ के दौरान फ्रांस के नौसैनिक अधिकारी रियर एडमिरल ओलिवर लिबास ने कहा कि गोवा में भारतीय नौसेना के साथ साझा अभ्यास  करने पर उन्हें खुशी हो रही है।





फ्रांसीसी नौसैनिक अधिकारी फ्रांस के विमानवाहक पोत ‘चार्ल्स द गाल’ के कमांडर हैं।  गोवा में उनकी मौजूदा तैनाती फ्रांस के लिये काफी अहमियत रखती है। गोवा में पहुचंने के पहले उनका पोत भू-मध्यसागर में तैनात था। उन्होंने बताया कि उनके पोत ने ओमान की खाड़ी में पनडुब्बी नाशक युद्ध में भाग लेकर गोवा आया है।

फ्रांसीसी अधिकारी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच वरुण साझा नौसैनिक अभ्यास के तहत  अब तक होने वाला सबसे बड़ा अभ्यास है। इसमें भारत और फ्रांस के 11 सबसे आधुनिक पोत भाग ले रहे हैं। इसमें दो विमानवाहक पोत औऱ दो पनडुब्बियां भाग ले रही हैं। इस दौरान एंटी-एयर , एंटी सर्फेस औऱ एंटी सबमरीन युद्ध की ट्रेनिंग दोनों नौसेनाएं करेंगी। ये अभ्यास 10 मई तक गोवा के तट पर चलेंगे और इसके बाद दोनों नौसेनाएं वरुण का दूसरा चरण अफ्रीकी देश जिबूती के समुद्री  इलाके में करेंगे।

उन्होंने कहा कि गोवा के तट पर हार्बर अभ्यास सम्पन्न हो चुका है औऱ समुद्री चरण 07 मई से शुरू होगा। दोनों देशों के बीच साझा नौसैनिक अभ्यास साझा सामरिक नजरिये के तहत हो रहा है। फ्रांसीसी कमांडर ने कहा कि इसका साझा उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित  रखना है। समुद्री सुरक्षा के लिये क्षमता निर्माण करना है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेहतर तालमेल करना है।

गौरतलब है कि हिंद महासागर में फ्रांस का रीयूनियन द्वीप  है जिस नाते फ्रांस अपने को हिंद महासागर का देश भी कहता है।  इस नाते भारत और फ्रांस हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के लिये साझा भूमिका निभा रहे हैं।

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