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स्पेशल रिपोर्ट: 36 साल की सेवा के बाद INS रंजीत को मिलेगी भावभीनी विदाई

आईएनएस रंजीत
फाइल फोटो

नई दिल्ली। साढ़े तीन दशक तक हिंद महासागर के इलाके में  अपना दबदबा स्थापित करने वाला भारतीय नौसेना के अग्रिम मोर्चे का युद्धपोत मिसाइल विध्वंसक पोत ‘आईएनएस रंजीत’ को भारतीय नौसेना छह मई को भावभीनी विदाई देगी।





इस  तरह छह मई को भारतीय नौसेना के इस युद्धपोत के  एक गौरवशाली युग का अंत होगा। आईएनएस  रंजीत काशिन वर्ग के पांच विध्वंसक पोतों में से तीसरा है जिसे पूर्व सोवियत संघ में बनाया गया था और इसका भारतीय नौसेना में 1983 में कमीशन हुआ था। यह पोत एक सादे समारोह में विशाखापतनम नौसैनिक गोदी में सेवामुक्त कर दिया जाएगा। इस समारोह में आईएनएस रंजीत पर सेवा देने वाले  सभी नौसैनिको को आमंत्रित किया गया है। इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी होंगे जिन्होने आईएनएस रंजीत पर अपनी सेवा दी है।

आईएनएस  रंजीत को तत्कालीन सोवयित संघ के यार्ड- 2203 पर बनाया गया था। यह यार्ड आज के उक्रेन देश के निकोलाई शहर में स्थित है। इस पोत का कील 29 जून , 1977 को रखा गया था। इस पोत का रूसी नाम लोवकली रखा गया था और इसे भारतीय नौसेना में 15 सितम्बर , 1983 में कमीशन  किया गया था।  तब पूर्व नौसेनाध्यक्ष एडमिरल विष्णु भागवत इस पोत के कैप्टन थे।  इस पोत को वह ब्लैक सी, भूमध्यसागर , रेड सी और अरब सागर से होकर भारत लाए।

36 साल के सेवाकाल में इस पोत की सेवाएं पश्चिमी और पूर्वी नौसैनिक कमांड में ली गई।  इस पोत  ने 1991-92 में पहली बार भारत-अमेरिका नौसैनिक अभ्यास मालाबार में भाग लिया था। इस पोत ने पहली बार 2003 में चीनी नौसेना के पैसेज अभ्यास में भाग लिया था।  रूस के साथ पहले इन्द्र नौसैनिक अभ्यास के लिये भी रूसी समुद्री इलाके में भेजा गया था। इस पोत को साल 2004 के सूनामी के दौरान राहत कायों में भी लगाया गया था। इस पोत की कप्तानी करने वाले कई नौसैनिक कमांडर बाद में भारत के नौसेना प्रमुख बने।

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