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स्पेशल रिपोर्ट: अंडमान सागर में भारत-म्यांमार की साझा निगरानी

इंडो-म्यांमार निगरानी दल

नई दिल्ली।  भारत और म्यांमार की नौसेनाएं मिल कर अंडमान सागार में साझा निगरानी कर रही हैं । एक दूसरे के साथ तालमेल से आयोजित यह साझा निगरानी कार्यक्रम 20 मई से शुरू हुआ जो 28 मई तक चलेगा।





इस साझा गश्ती के लिये  म्यांमार की नौसेना के युद्धपोत यूएमएस  किगं  ताबिन श्वेईहते और यूएमएस इनले 20 मई को  अंडमान एवं निकोबार कमांड के पोर्ट ब्लेयर बंदरगाह पर पहुंचे। दोनों नौसेनाओं के बीच लगातार  8वां साल हो रहा इंडो-म्यांमार कोआर्डिनेटेड पेट्रोल (IMCOR)  आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, गैरकानूनी  मछली पकड़ने, मानव तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से किया जाता है। यह साझा अभ्यास साल 2013 से चल रहा है।

इस साझा गश्ती के बारे  में यहां नौसेना के प्रवक्ता ने कहा कि  इस साझा अभ्यास के जरिये आपसी समझ बेहतर हुई है और समुद्री आदान-प्रदान के लिये दोनों नौसेनाओं के बीच  बेहतर पेशेवर रिश्ता विकसित हुआ है।

इंडो-म्यांमार निगरानी दल

इस साझा गश्ती कार्यक्रम में भारतीय नौसेना की ओर से भारतीय नौसैनिक युद्धपोत सरयू को भेजा गया है। इस साझा गश्ती कार्यक्रम में दोनों नौसेनाओं के समुद्र टोही विमान भी सहयोग करेंगे। दोनों देशों के युद्धपोत अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा(IMBL) के नजदीक गश्ती करेंगे। चार दिनों के भीतर ये दोनों युद्धपोत 725 किलोमीटर के इलाके में साझा गश्ती कर सकेंगे। तालमेल से की गई साझा गश्ती (कोरपैट) के दौरान दोनों युद्धपोत साझा अभ्यास और ड्रिल भी करेंगे।

 इस साझा गश्ती कार्यक्रम की अगुवाई  म्यांमार की नौसेना की ओर से कमोडोर ह्तेन विन कर रहे हैं जो ऐऱावदी नौसैनिक कमांड के कमांडर हैं। अंडमान पहुंचने पर उन्होंने भारतीय गश्ती दल के कमोडोर आशुतोष रिढोरकर से मिले जो नेवल कम्पोनेंट कमांडर हैं।

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