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स्पेशल रिपोर्ट: चीन के छिंगताओ पहुंचे भारतीय पोत

आईएनएस कोलकाता

नई दिल्ली। चीन के अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक निरीक्षण समारोह इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के मौके पर आमंत्रित दो भारतीय नौसैनिक पोत चीन के छिंगताओ नौसैनिक अड्डे पर मंगलवार को जब पहुंचे तब उनकी अगवानी चीनी  नौसैनिक बैंड द्वारा प्रस्तुत संगीत के साथ हुई ।





गौरतलब है कि चीन इस नौसैनिक निरीक्षण का आयोजन चीनी जन मुक्ति सेना की 70वीं सालगिरह के मौके पर कर रहा है। भारतीय विध्वंसक पोत आईएनएस कोलकाता और तेलवाहक पोत आईएनएस शक्ति जब छिंगताओ नौसैनिक अड्डे पर पहुंचे तो दोनों ने चीनी जनगणराज्य के लिये 21 तोपों की सलामी दी।

छिंगताओ नौसैनिक अड्डे के हारबर पर चीनी जन मुक्ति सेना की नार्थ सी फ्लीट के  अधिकारियों ने भारतीय पोतों की अगवानी की। गौरतलब है कि यह तीसरा मौका है जब भारतीय नौसेना चीनी नौसेना द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग ले रही है। इसके पहले चीनी नौसेना ने 2009  और 2014 में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का आयोजन किया था।

चीन के इस आयोजन में भारतीय नौसेना की भागीदारी के बारे में यहां नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन डी के शर्मा ने बताया कि इससे यह झलकता है कि भारत इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि दोनों नौसेनाओं  के बीच समुद्री सहयोग औऱ गहरा हो और दोनों देशों के बीच दोस्ती की गांठ भी और मजबूत हो। अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक निरीक्षण के लिए भारतीय नौसेना ने अपने सबसे अच्छे युद्धपोतों को इसलिय तैनात किया है कि दोनों के बीच आपसी भरोसा बढे और आपसी तालमेल भी मजबूत हो ताकि नौसैनिक निरीक्षण में भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच समुद्री चिंताओं को दूर करने के लिये आपसी सहयोग बढ़े।

छिंगताओ नौसैनिक अड्डे के हारबर पर मौजूदगी के दौरान भारतीय नौसैनिक अधिकारी चीनी नौसेना के आला अधिकारियों के साथ शिष्टाचार मुलाकात करेंगे। इस दौरान अन्य नौसेनाओं के साथ भी पेशेवर आदान प्रदान होगा। 23 अप्रैल को फ्लीट रिव्यू की सलामी चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग लेंगे।

आईएनएस कोलकाता पर भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी एक स्वागत समारोह आयोजित करेंगे जिसमें चीनी नौसेना के आला अधिकारियों के अलावा अऩ्य देशों के नौसैनिक अधिकारी भी भाग लेंगे।

चीन पहुंचने के पहले भारतीय पोत वियतनाम की काम रन्ह खाड़ी भी सद्भभावना दौरे पर  गए थे। चीन से लौटते वक्त आईएनएस कोलकाता और शक्ति दक्षिण कोरिया के पूसान बंदरगाह और सिंगापुर के नौसैनिक अड्डे पर भी जाएंगे।

नौसैनिक प्रवक्ता के मुताबिक दक्षिण चीन सागर को भारतीय पोतों की सालाना तैनाती भारत की एक्ट ईस्ट पालिसी के अनुरुप की जाती है। भारतीय नौसेना की कोशिश है कि सागरों के जरिये देशों को एक करो। इसके जरिये भारत मैत्री के पुल का विस्तार करना चाहता है ताकि दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ आर्थिक, राजनयिक औऱ सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत हों।

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