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Special Report: दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना का 3 देशों के साथ शक्ति प्रदर्शन

नौसेना का 3 देशों के साथ शक्ति प्रदर्शन

नई दिल्ली।  दक्षिण चीन सागर में भारतीय युद्धपोतों ने अमेरिका, जापान और फिलीपींस के युद्धपोतों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। चीन के निकट वाले इस समुद्री इलाके में चीन द्वारा दादागीरी दिखाने के मद्देनजर भारतीय युद्धपोतों का समान विचार वाले देशों के साथ परेड करना काफी अहम है।





भारतीय युद्धपोतों में भारत के आधुनिकतम गाइडेड मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत ‘आईएनएस कोलकाता’ औऱ तेलवाहक पोत ‘आईएनएस शक्ति’ शामिल थे। यहां भारतीय  नौसेना के अधिकारी ने  दक्षिण चीन सागर में तीन अन्य देशों के साथ भारतीय पोतों के विचरण को सुरक्षित समुद्री माहौल बनाने के इरादे से बताया है। प्रवक्ता कैप्टन डी के शर्मा ने यह भी कहा कि इसका एक और उद्देश्य तीन अन्य देशों के साथ मिल कर यह समुद्री विचरण करना मौजूदा साझेदारी को मजबूती प्रदान करना और आपसी समझ को बेहतर करना है।

दक्षिण चीन सागर में तीन से 09 मई तक चले इस साझा शक्ति प्रदर्शन को आपसी तालमेल विकसित करने के इरादे से भी बताया  गया है। इस साझा ग्रुप सेल में चार देशों के छह युद्धपोतों ने भाग लिया।  इस साझा परेड में अमेरिका के अर्ले बुर्क वर्ग के विध्वंसक पोत यूएसएस विलियम्स, जापान के हेलिकॉप्टर वाहक युद्धपोत मुरासामे और फिलीपींस के फ्रिगेट आंद्रे बोनफासियो शामिल थे।

दक्षिण चीन सागर में चारों देशों के युद्धपोतों ने कई तरह के साझा युद्धाभ्यास भी किये। एक दूसरे के डेक पर अपने नौसैनिक और विमान उतारे, ईंधन औऱ अन्य साज सामान लोड करने का अभ्यास किया ताकि जरुरत के वक्त एक दूसरे की प्रक्रियाओं को समझ सकें।

भारतीय नौसेना के पोत छिंगताओ में चीनी नौसेना द्वारा आयोजित  इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के बाद दक्षिण चीन सागर के अन्य तटीय देशों के सद्भावना दौरे पर गए थे। भारतीय पोत  वियतनाम की  काम रन्ह खाड़ी और  दक्षिण कोरिया के बूसान  तट पर भी गए। बूसान में तैनाती के दौरान भारतीय पोतों ने आसियान रक्षा मंत्री वार्ता ( ए डी एम एम ) के नौसैनिक आयोजन समुद्री सुरक्षा फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास  में भाग लिया। इस साझा अभ्यास में ब्रुनेई, चीन, मलयेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के युद्धपोतों ने भाग लिया।

आसियान रक्षा मंत्री डायलाग का  दूसरे चरण का नौसैनिक  आयोजन 09 से 12 मई तक दक्षिण चीन सागर में होगा।

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