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स्पेशल रिपोर्ट: कतर के साथ भारतीय नौसेना का पहला नौसैनिक अभ्यास

कतर में साझा नौसैनिक अभ्यास

नई दिल्ली। खाड़ी के मुल्क कतर के साथ पहली बार साझा नौसैनिक अभ्यास इन दिनों दोहा के समुद्र तट पर चल रहा है। जैर-अल-बहर यानी समुद्री कोलाहल नाम से आयोजित इस अभ्यास के लिये भारतीय नौसेना के युद्धपोत गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिखंड के अलावा समुद्र गश्ती टोही विमान पी-8-आई भाग ले रहे हैं।





गौरतलब है कि भारत खाड़ी के अन्य देशों ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के साथ पहले से ही नौसैनिक तालमेल और साझा युद्धाभ्यास करता रहा है। अगले महीने सऊदी अरब के साथ भी एक साझा युद्धाभ्यास आयोजित करने का फैसला किया गया है। इस साझा अभ्यास का हारबर फेज 17 नवम्बर से शुरू हुआ जो मंगलवार तक चलेगा। इसके बाद अभ्यास का समुद्री चरण शुरू होगा। हारबर फेज के अभ्यास के दौरान एक सेमिनार, पेशेवर मेलजोल, आधिकारिक मुलाकातें, खेल और सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित हुईं।

यहां नौसैनिक प्रवक्ता के मुताबिक कतर अमीर नौसैनिक बलों के साथ साझा नौसैनिक अभ्यास के आयोजन से दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग मजबूत होगा और दोनों के बीच समुद्री तालमेल का माहौल बनेगा।

साझा अभ्यास के समुद्री चरण के दौरान रणनीतिक समुद्री अभ्यास होंगे। इस दौरान समुद्री सतह पर होने वाली गतिविधियां, हवाई सुरक्षा, समुद्री टोही और प्रति आतंकवादी अभ्यास होंगे।

कैप्टन विशाल विश्नोई की अगुवाई में आईएनएस त्रिखंड भारतीय नौसेना का अत्यधिक आधुनिक अग्रणी युद्धपोत है जो कई तरह के सेंसरों औऱ हथियार प्रणालियों से लैस है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक कमांड का हिस्सा है। इस अभ्यास के लिये समुद्र टोही विमान पी-8-आई को तैनात करना काफी अहम है। इस विमान में समुद्र टोही भूमिका निभाने के लिये नवीनतम तकनीक वाली प्रणालियां तैनात हैं।

साझा अभ्यास में कतर की नौसेना की ओर से पोत नाशक मिसाइलों से लैस बर्जन श्रेणी के नवीनतम फास्ट एटैक पोत और राफेल लड़ाकू विमानों को उतारा गया है। भारत और कतर के बीच पारम्परिक तौर पर सौहार्दपूर्ण रिश्ते रहे हैं। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पहली बार साझा नौसैनिक अभ्यास के शुरू होने से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग मजबूत होगा। इससे खासकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री डाकाजनी और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद मिलेगी।

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