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स्पेशल रिपोर्ट: भारतीय नौसेना अब खरीदार नहीं निर्माता बने- नेवी चीफ

करमबीर सिंह
फाइल फोटो

नई दिल्ली। नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा है कि भारत को खरीदार नौसेना से निर्माता नौसेना में तब्दील होना होगा। यहां  वाणिज्य संगठन फिक्की औऱ नौसेना द्वारा आयोजित एक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए  नौसेना प्रमुख ने कहा कि मेक इन इंडिया के शुरू होने के  50 साल पहले से ही  भारतीय नौसेना स्वदेशी पोत निर्माण को बढ़ावा देती रही है।





नौसेना प्रमुख ने कहा कि  स्वदेशी पोत निर्माण में भारतीय नौसेना ने भारी निवेश किया है।  इसके लिये 1964 में ही भारतीय नौसेना ने आतंरिक पोत डिजाइन  आफिस की स्थापना की थी।  उन्होंने बताया कि नौसेना ने अब तक 19 वर्गों में 90 युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण किया है। साल 1961 में कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपब्लिडर्स  एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा पहला युद्धपोत ‘आईएनएस  अजय’  के निर्माण के बाद अब तक देश की नौसैनिक गोदियों में 130 प्लेटफार्मों  का निर्माण हो चुका है।

एडमिरल सिंह ने कहा कि नौसैनिक युद्धपोत निर्माण भारत में कामयाबी की कुछ सफल कहानियों में गिना जा सकता है।  उन्होंने कहा कि खरीदार नौसेना से निर्मता नौसेना की यह यात्रा काफी मुश्किलों भरी रही है। उन्होंने कहा कि नौसेना के सामने आज भी कई नई चुनौतियां पेश हो रही हैं। गौरतलब है कि भारत में स्वदेशी प्रयासों से विमानवाहक पोत  विक्रांत और परमाणु पनडुब्बी जैसे अत्याधुनिक नौसैनिक  पोतों का निर्माण कर भारत को दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल किया है।

एडमिरल सिंह ने कहा कि पोत निर्माण गतिविधियों से देश की सामरिक क्षमता औऱ अर्थव्यवस्था को भारी फायदा पहुंचता है। उन्होंने कहा कि पोत निर्माण काफी कौशलता की मांग करता है।  इससे कुशल कामगारों को भी काम मिलता है। मिसाल के तौर पर  प्रोजेक्ट-17-ए  नाम का जो फ्रिगेट देश में बन रहा है उस पर 45,00 कामगार जुड़ेंगे। लेकिन इससे जुड़े सहायक उद्योगों में 28 हजार लोगों को काम मिलेगा।  उन्होंने बताया कि देश में बन रहे विमानवाहक पोत आईएसी-1 के लिये स्टील अथारिटी आफ  इंडिया ने 50 हजार टन स्वदेशी स्टील की सप्लाई की जिसका हमें आयात करना पड़ता।

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