Air Force

अब नए सिद्धांत के तहत काम करेंगी तीनों सेनाएं

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नई दिल्ली। थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल की जरूरत को समझते हुए सशस्त्र बलों के लिए संयुक्तता का नया सिद्धांत पेश किया गया है। इस सिद्धांत को ‘Joint Doctrine Indian Armed Forces 2017’ नाम दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे सेना की क्षमता बढ़ेगी, संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल होगा और धन की बचत हो सकेगी। पहली बार संयुक्तता का सिद्धांत 2006 में जारी किया गया था।





सेनाओं में माना जा रहा है कि तब के बाद से हालात काफी बदल गए हैं, जिनके लिए संशोधन की जरूरत पड़ी। नेवी चीफ और चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के चेयरमैन सुनील लांबा ने मंगलवार को सशस्त्र बलों के लिए 86 पेज का संयुक्तता का नया सिद्धांत जारी किया। इस मौके पर सेना प्रमुख बिपिन रावत और भारतीय वायुसेना प्रमुख बी एस धनोआ भी उपस्थित थे।

‘इंटिग्रेटेड डिफेंस स्टाफ’ ने यह सिद्धांत तीनों सेनाओं के सहयोग से तैयार किया है। यह कहा गया है कि सैन्य ताकत के बीच तालमेल के लिए मूलभूत तत्व का काम करेगा। मोर्चा चाहे आसमानी हो जमीनी, जल हो या साइबर स्पेस, सभी क्षेत्रों में ऑपरेशंस की प्लानिंग और अमल के लिए यह फ्रेमवर्क काम करेगा। इसे जिंदगी के दूसरे पहलुओं की तरह वक्त की मांग बताया गया है।

यह सिद्धांत बताता है कि भविष्य में आतंकवादियों की उकसावे की गतिविधियों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ हो सकती है। सिद्धांत के मुताबिक़ नई दिल्ली हिंद महासागर में बाहरी शक्तियों की उपस्थिति और भूमिका के बारे में चिंतित है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर युवाओं की अतिवादिता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक चुनौती के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

आज के सेटेलाइट कंट्रोल सिस्टम ने युद्ध का तरीका ही बदल दिया है। भविष्य के युद्धों का चरित्र, अस्पष्ट, संक्षिप्त, तेज, घातक, तीव्र, सटीक, अप्रतिबंधित, अप्रत्याशित और हाइब्रिड होने की संभावना है। ऐसे में भविष्य के युद्धों की सबसे जरूरी आवश्यकता सशस्त्र बलों का संयुक्त अभियान ही है।

गौरतलब है कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और सरकार को सेना से जुड़े मसलों पर एक सूत्री सलाह के लिए चीफ आफ डिफेन्स स्टाफ की नियुक्ति की मांग होती रही है। खासकर करगिल संघर्ष के बाद इसकी सख्त जरूरत महसूस की गई।

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