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कुलभूषण जाधव के परिजन अज्ञात स्थान पर गए

कुलभूषण जाधव

नई दिल्ली: पड़ोसी देश पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में कुलभूषण जाधव को मौत की सजा के ऐलान के बाद मुंबई में रह रहा उनका परिवार गहरे सदमे में है। जाधव के बारे में खबर आने के बाद मीडियाकर्मी उनके परिजनों से बात करने के लिए पवई स्थित उनके अपार्टमेंट पहुंचने लगे तो परिवार वहां से किसी अज्ञात स्थान पर चला गया।





इस बीच एक समाचार एजेंसी के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है कि पुलिस के कुछ जवानों ने पांचवीं मंजिल पर रह रहे जाधव के परिवार से मुलाकात की। हालांकि, कुलभूषण को पाकिस्तान द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद उनके परिवार का कोई भी सदस्य सार्वजनिक रूप से अभी तक सामने नहीं आया है। फिलहाल पुलिस ने अपार्टमेंट के बाहर सुरक्षा भी बढ़ा दी है।

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कुलभूषण के करीबी दोस्तों ने बताया कि जाधव की पत्नी, उनकी मां, बेटा शुभांकर और बेटी भैरवी रविवार को छुट्टियां मनाने पुणे से मुम्बई आए थे। वे यहाँ हीरानंदानी गार्डंस में एक अपार्टमेन्ट के फ़्लैट में टिके थे। यह फ़्लैट जाधव परिवार का ही है। जाधव परिवार के एक अन्य दोस्त ने बताया कि करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को भी घर के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक सरकार की ओर से जाधव परिवार से आधिकारिक तौर पर कोई संपर्क नहीं किया गया है।

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जाधव इसी आवासीय सोसायटी में स्थित सिल्वर ओक इमारत में अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रहते थे। मीडिया में उन्हें पाकिस्तान में मौत की सजा सुनाए जाने की खबर आते ही सिल्वर ओक इमारत के निवासी और कई पड़ोसी हाथों में तख्तियां लिए परिसर में जमा हो गए। जाधव के पड़ोसियों और दोस्तों ने मीडिया से कहा कि यह बिल्कुल समझ से परे है कि जाधव खुफियागिरी या इस तरह की किसी गतिविधि में संलिप्त हो सकते हैं, जिसके लिए उन्हें दोषी ठहराया गया है।

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एक पड़ोसी ने कहा कि वास्तव में भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्ति लेने के बाद वह अपना खुद का कारोबार खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे। भारत सरकार को उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए। एक अन्य पड़ोसी सुब्रतो मुखर्जी ने कहा कि जाधव और उनका परिवार हमेशा सोसायटी के सदस्यों के मददगार रहे हैं और यहां तक कि मुखर्जी ने उनके माता-पिता से ही मराठी सीखी थी।

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मुखर्जी ने कहा कि हम किसी सोसायटी से संबंधित किसी समस्या या मुद्दे के लिए उनसे संपर्क नहीं करते थे, लेकिन वह हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे। कुछ अन्य ने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द उनकी रिहाई सुनिश्चित कराए।
जाधव का परिवार सांगली से है और उनके पिता सुधीर जाधव मुंबई में एसीपी रह चुके हैं, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सुधीर जाधव ने लगातार कहा है कि उनके बेटे को मामले में फंसाया गया है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उनके परिवार का कोई भी सदस्य सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिया।

गौरतलब है कि जाधव (46) को कथित तौर पर तीन मार्च 2016 को बलूचिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था। पाकिस्तान प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अपना नाम हुसैन मुबारक पटेल रख लिया था। पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि जाधव को खुफियागिरी और विध्वंसक गतिविधियों में संलिप्तता तथा पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

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