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सबमरीन INS वेला: दुश्मन को ढूंढकर सटीक निशाना लगाने में माहिर, जानें इससे जुड़ी 7 खूबियां

पिछले दिनों समन्दर की धाक बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट-75 के तहत आने वाली 6 पनडुब्बियों में से चौथी स्कॉर्पिन श्रेणी की सबमरीन ‘वेला’ को पानी में उतारा गया। इसे मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने फ्रांस कंपनी मेसर्स नेवल ग्रुप (पूर्व नाम डीसीएनएस) के सहयोग से भारत में ही निर्मित किया। ‘वेला’ सबमरीन को एडवांस तकनीक के आधार पर बनाया गया है जो नौसेना की भावी ताकतों के लिए बनाई जाने वाली पनडुब्बियों में से एक है। हालांकि ‘वेला सबमरीन’ एक न्यूक्लियर सबमरीन न होकर एक डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन है लेकिन फिर भी इसकी खूबियां एक से बढ़कर एक हैं। आइये जानें इसकी 7 खूबियों को-





प्रोजेक्ट-75 में आने वाली चौथी सबमरीन

INS वेला

प्रोजेक्ट-75 के तहत ‘वेला’ स्कॉर्पिन श्रेणी की चौथी सबमरीन है। प्रोजेक्ट-75 में मुख्य रूप से उन पनडुब्बियों को रखा गया है जिनके जुड़ने से भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा होगा। यह योजना भारत ने फ्रांस कंपनी के साथ मिलकर सन् 2005 में बनाई थी। प्रोजेक्ट-75 के तहत 6 पनडुब्बियां हैं जिसमें ‘वेला’ चौथी सबमरीन है। इसमें पहली तीन पनडुब्बियां आईएनएस कलवरी, आईएनएस खंडेरी और आईएऩएस करंज भारतीय नौसेना में पहले से ही शामिल हैं। ‘वेला’ के बाद आईएनएस वागीर एवं आईएनएस वागशीर पनडुब्बियों पर भी काम जारी है।

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