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INS SUMITRA : भारतीय नौसेना का जांबाज हीरो

आईएनएस सुमित्रा

नई दिल्ली। बांग्लादेश में चक्रवाती तूफान के दौरान चटगांव से करीब 100 मील दूर 27 लोग समुद्र में बहे जा रहे थे कि आईएनएस सुमित्रा (INS SUMITRA) पर तैनात जवानों की नजर उन पर पड़ी। आईएनएस सुमित्रा तुरंत उनकी मदद के लिए पहुंच गया और सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया। चटगांव के दक्षिण में 90 मील की दूरी पर बचाव अभियान चलाया गया है। बांग्लादेश इस समय चक्रवाती तूफान ‘मोरा’ की चपेट में है।





बांग्लादेश में चक्रवाती तूफान में फंसे सभी 27 लोगों को सुरक्षित बचा लिया

ऐसा पहली बार नहीं है, जब आईएनएस सुमित्रा ने कोई बचाव अभियान चलाया हो, भारतीय सेना का ये जांबाज हीरो इससे पहले भी अपने जज्बे और शक्ति का लोहा मनवा चुका है। ये वही आईएनएस है जो यमन में फंसे भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए सबसे पहले मदद के लिए पहुंचा था। आइए, आपको बताते हैं आईएनएस सुमित्रा पी (59) से जुड़ी खास बातें।

आईएनएस सुमित्रा

आॅपरेशन राहत के दौरान आईएनएस सुमित्रा ने साढे तीन सौ नागरिकों को सुरक्षित किया।

भारत का मुख्य गश्ती जलयान 

जहाज का निर्माण स्वदेशी डिजायन पर आधारित है। इसे मेसर्स गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) ने निर्मित किया है। निर्माण के दौरान इसे Yard 1211 के नाम से जाना जाता था। एनएस सुमित्रा भारतीय नौसेना के चौथे और अंतिम सरयू वर्ग का गश्ती पोत है। यह भारत का अग्रणी पोत है। इसे तटीय और अपतटीय गश्त, समुद्र सीमा निगरानी और संचार और अपतटीय संपत्तियों की निगरानी के लिए बनाया गया था। वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास कुल 47 गश्ती जहाज हैं।

ऐसा है आईएनएस सुमित्रा

आईएनएस सुमित्रा

आईएनएस सुमित्रा

  • इसका वजन 2200 टन है। इसकी गति 26 किलोनॉट है। यह मध्यम और शॉर्ट रेंज वाले हथियारों से लैस है, जिनमें 76 एमएम गन, क्लॉज-इन वेपॅन सिस्टम और कम्यूनिकेशन इंटेलिजेंसी सिस्टम शामिल है।
  • यह लाइट वेट वाले हेलिकॉप्टर ध्रुव को भी आॅपरेट कर सकता है।
  • इसकी लंबाई 344 फीट यानी 105 मीटर और बीम 13 मीटर 43 फीट है। इस पर आठ अफसरों सहित 108 सोल्जर्स क्रू हैं।
  • 6 दिसंबर 2010 में लांच हुए इस पोत को 4 सितंबर 2014 को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया, उस समय इसे चेन्नई में तैनात किया गया था। ये जहाज कई विदेश दौरे भी कर चुका है।
  • वर्ष 2014 में अधिकृत किए जाने के बाद से इस जहाज को कई अभियानों में तैनात किया गया। ‘आॅपरेशन राहत’ के दौरान इस जहाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके जरिए 2015 में देश के 350 नागरिकों के पहले जत्थे को युद्धग्रस्त यमन से बाहर निकाला गया था।
आईएनएस सुमित्रा

आॅपरेशन राहत के दौरान आईएनएस सुमित्रा ने साढे तीन सौ नागरिकों को सुरक्षित किया।

प्रवेश के मौके पर पहली बार हुआ था ध्वजारोहण

इस जलयान के अधिकरण समारोह में राष्ट्रीय सलामी प्रदर्शन किया गया और भारतीय नौसेना बेड़े में शामिल होने पर भारतीय नौसेना में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था।

आईएनएस सुमित्रा

स्वदेशी डिजाइन पर है आधारित है आईएनएस सुमित्रा

‘आॅपरेशन राहत’ के तहत बचाए थे 350 नागरिक

आईएनएस सुमित्रा

युद्धग्रस्त यमन से नागरिकों को बचाने पहुंचा था सबसे पहले

तीस मार्च 2015 को आईएनएस सुमित्रा और इसके क्रू ने यमन में फंसे 350 नागरिकों को सुरक्षित बचाया था। भारतीय नागरिकों को इसी जलयान की मदद से यमन बंदरगाह एदेन से जिबूती पहुंचाया गया था। ये कार्य भारतीय नौसेना के ‘आॅपरेशन राहत’ अभियान के तहत किया गया था।

यमन में गृहयुद्ध जैसी स्थिति के बाद हालात बिगड़ने के कारण हजारों लोग बेघर और बर्बाद हो गए थे। यमन में करीब भारत के चार हजार से भी ज्यादा लोग काम करते थे। युद्धपोत आईएनएस सुमित्रा जो उस वक्त अदन की खाड़ी में गश्त पर था इसे वहां से सबसे पहले यमन के अदन बंदरगाह इन नागरिकों की मदद के लिए भेजा गया। 31 मार्च को 350 भारतीयों के पहले जत्थे को निकालकर जिबुती पहुंचाया। जिबूती से इन नागरिकों को कोच्चि व मुंबई लाया गया था। इसके बाद अन्य जलयान नागरिकों के अन्य जत्थे को लाने यमन बंदरगाह पहुंचे थे।

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