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हिंद महासागर में ईईजेड की निगरानी पर आईएनएस शार्दुल

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस शार्दुल को हिंद महासागर में तैनात कर दिया गया है। हालांकि, इसकी तैनाती इस क्षेत्र में सिर्फ दो महीने ही रहेगी। केवल भारत में ही नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में अबाधित आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए सुरक्षित और स्थिर क्षेत्रीय वातावरण सुनिश्चित करने और भारत के राष्ट्रीय उद्देश्य को देखते हुए आईएनएस शार्दुल इस क्षेत्र में निगरानी करने के लिए तैनात किया गया है।





शार्दुल ने तैनाती के पहले चरण में 8 से 26 मार्च, 2017 तक राष्ट्रीय तटरक्षक मॉरीशस के साथ तालमेल से मॉरीशस में ईईजेड (संयुक्त विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र) की निगरानी की। आईएनएस शार्दुल ने ईईजेड निगरानी के पहले चरण के लिए 27 मार्च, 2017 को सेशेल्स के ईईजेड में प्रवेश किया। इस युद्धपोत ने कमांडर रोहित मिश्रा की कमान में 28 मार्च, 2017 को ओटीआर के लिए पोर्ट विक्टोरिया में प्रवेश किया।

आईएनएस शार्दुल की तैनाती का उद्देश्य आईयूयू में मछली पकड़ने और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराना है। इस जहाज ने इस क्षेत्र में व्यापारियों और मछली पकड़ने वाली नौकाओं के साथ व्यापक पूछताछ की ताकि व्यापारिक यातायात के पारगमन के लिए समुद्र को सुरक्षित बनाकर सेशेल्सो के ईईजेड की सुरक्षा की जा सके।

आईएनएस शार्दुल 6 अप्रैल, 2017 को दूसरे ओटीआर और मिशन डिब्रीफ के लिए पोर्ट विक्टोरिया में प्रवेश करेगा। सेशेल्स की संयुक्त ईईजेड निगरानी की डिब्रीफ में सेशेल्स में नियुक्त भारत के उच्चायुक्त, एसपीडीएफ और सेशेल्स तटरक्षक के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।

17 अप्रैल को भारत के लिए लौटने से पूर्व यह जहाज सेशेल्स की ईईजेड निगरानी के तीसरे चरण के लिए 8 अप्रैल, 2017 को पोर्ट विक्टोरिया बंदरगाह से चलेगा। 2009 से भारतीय नौसेना मेजबान देशों के अनुरोध पर देश आधारित व्यापक ईईजेड की गश्त करने के लिए इस क्षेत्र में जहाजों की तैनाती कर रही है। इसी जहाज की ऐसी पिछली तैनाती दिसंबर, 2016 में की गई थी।

मेजबान देश के तटरक्षक बल के साथ भारतीय नौसेना के जहाज की संयुक्त गश्त के लिए प्रतिबद्ध और समर्पित तैनाती इस क्षेत्र के राष्ट्रों के बीच संबंधों और मैत्री को मजबूत बनाती है। आईएनएस शार्दुल भारतीय नौसेना का एक बड़ा लैंडिंग शिफ्ट टैंक है, जिसका मुख्य कार्य सैनिकों, वाहनों और हथियारों को ढ़ोने के साथ-साथ क्षेत्र में युद्ध उपकरण और कर्मियों को पहुंचाना है। इस जहाज को प्रथम प्रशिक्षण स्‍क्‍वाड्रन के साथ नियमित रूप से तैनात किया जाता है और यह भारतीय नौसेना के युवा अधिकारियों के प्रारंभिक सामुद्रिक प्रशिक्षण के लिए जिम्मेदार है।

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