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नौसेना में जल्द शामिल होगी INS कलवरी

कलवरी-पनडुब्बी

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना में जल्द ही एक और सबमरीन शामिल होने वाली है। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि पहली स्वदेशी स्कॉर्पिन ‘पनडुब्बी कलवरी’ इस माह के अंत तक भारतीय नौसेना में शामिल कर ली जाएगी। लांबा के मुताबिक, कलवरी परीक्षण के अंतिम चरण से गुजर रही है और उम्मीद है कि जुलाई-अगस्त में नौसेना में शामिल हो जाएगी। पनडुब्बी ने 27 मई को एक टॉरपीडो को सफलतापूर्वक फायर किया था। सूत्रों के मुताबिक, इस पनडुब्बी को नौसेना में शामिल करने से पहले यह इसका अंतिम और अहम परीक्षण था।





1,870 टन है इस सबमरीन का वजन

कलवरी श्रेणी सबमरीन का वजन 1,870 टन है, भारत में स्कॉर्पिन श्रेणी की छह पनडुब्बियों का निर्माण हो रहा हैं, जिनमें कलवरी पहली युद्धक पनडुब्बी है। कलवरी ने दो मार्च को पहली बार सफलतापूर्वक एंटी-शिप मिसाइल फायर की थी। स्कॉर्पिन पनडुब्बी का निर्माण फ्रांस के डीसीएनएस द्वारा प्रौद्योगिकी स्थानांतरण के साथ प्रोजेक्ट 75 के तहत मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया था। दो पनडुब्बियां तैयार हैं, जबकि चार अन्य का निर्माण चल रहा है। दूसरी पनडुब्बी ‘खांदेरी’ को इस साल 12 जनवरी को लॉन्च किया गया था, जिसे बंदरगाह व समुद्र की सतह पर कठिन परीक्षणों के दौर से गुजरना होगा, जिसके बाद उसे पानी के नीचे उतारे जाने के बाद नौसेना में शामिल किया जाएगा।

ये हैं सबमरीन कलवरी की खासियत 

INS कालवरी

INS कालवरी पानी के अंदर तथा सतह पर टॉरपीडो, एंटी-शिप मिसाइल के माध्यम से वार कर सकता है (फाइल फोटो)

अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त स्कॉर्पिन चकमा देने में माहिर है और गाइडेड हथियारों के माध्यम से दुश्मनों पर वार करने में सक्षम है। स्कॉर्पिन पानी के अंदर तथा सतह पर टॉरपीडो, एंटी-शिप मिसाइल के माध्यम से वार कर सकता है। कलवरी वर्ग भारतीय नौसेना के लिए बनाए जाने वाले स्कॉर्पिन श्रेणी की पनडुब्बी पर आधारित पनडुब्बियों का एक श्रेणी है। यह डीजल-इलेक्ट्रॉनिक हमले पनडुब्बी का एक वर्ग है, जिसे फ्रांसीसी नौसैनिक रक्षा और ऊर्जा कंपनी DCNS द्वारा डिजाइन किया गया है और मुंबई में माज़गन डॉक लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है। 2005 में भारतीय नौसेना ने स्कॉर्पिन डिजाइन को चुना था।

2020 में नौसेना में शामिल हो जाएगा विमानवाहक पोत

श्रीलंका द्वारा चीनी पनडुब्बी को उसके डॉकयार्ड पर खड़ा न करने की अनुमति न देने के बारे में पूछे जाने पर नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘हम ना तो श्रीलंका के साथ किसी तरह की वार्ता कर रहे हैं और न ही उनके संपर्क में हैं। यह फैसला उनका खुद का है। स्वदेशी विमानवाहक पोत को नौसेना में शामिल किए जाने के बारे में पूछे जाने पर लांबा ने कहा कि आईएसी (Indigenous Aircraft Carrier) का निर्माण तय समय के हिसाब से चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि साल 2019 में उसका परीक्षण शुरू हो जाएगा और साल 2020 में नौसेना में शामिल हो जाएगा।’

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