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दूसरा विमानवाहक पोत क्यों बनाने की तैयारी में है भारत

नई दिल्ली: हिंद महासागर में बार-बार भारतीय सीमा में चीन की पनडुब्बियों के घुसने की रिपोर्ट पर भारत दूसरा विमानवाहक पोत बनाने की तैयारी में है। भारतीय नौसेना ने लक्ष्य तय किया है कि हिंद महासागर के इस इलाके में अगर कोई नजर दौड़ाए तो उसे सिर्फ भारत की इकलौती ताकत नजर आए।





माना जाता है कि चीन विमानवाहक पोत के बेड़े में बड़ा विस्तार करना चाह रहा है। चीन ने अभी हाल ही में पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत को पानी में उतारा। जिसके बाद भारत अपना दूसरा विमानवाहक पोत बनाने की तैयारी कर रहा है।

नौसेना कमांडरों का चार दिवसीय सम्मेलन शुक्रवार को खत्म हुआ। इस सम्मेलन में नौसेना में नए शिप शामिल करना, पुराने जहाजों का अपग्रेडेशन करना और पुर्जों के लिए विदेशों पर कम निर्भर रहने पर जोर दिया गया।

फिलहाल एक विमान वाहक पोत है भारतीय नौसेना में

भारतीय नौसेना के पास फिलहाल आईएनएस विक्रमादित्य के रूप में एक ही विमानवाहक पोत है। आईएनएस विराट और आईएनएस विक्रांत रिटायर हो गए हैं। आईएनएस विक्रमादित्य को 2013 में नौसेना में शामिल किया गया था। यह अधिकतम 36 एयरक्राफ्ट लेकर चलने में सक्षम है। इसकी मालवाहक क्षमता 45,400 टन है और यह एक बार में 25 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। यह 45 दिनों तक लगातार चल सकता है।

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