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फ्रांसीसी मदद से लड़ाकू विमानों के इंजन को मिलेगा बल

तेजस

नई दिल्ली। भारत के हल्के लड़ाकू विमान तेजस का कार्यक्रम पिछड़ने की बड़ी वजह थी कावेरी इंजन का सफल नहीं हो पाना। पर्याप्त शक्ति पैदा न कर पाने के कारण अब उम्मीद जागी है कि फ्रांस की मदद से न केवल यह इंजन कारगर साबित होगा, बल्कि सब ठीक रहा तो इस इंजन की मदद से देश के पास उपलब्ध SU-30 MKi विमानों को सुपर सुखोई में तब्दील किया जा सकेगा।





सैफ्रान की मदद से कावेरी इंजन के दोषों को दूर करना

लड़ाकू विमानों का सबसे बुनियादी सूत्र उनके इंजन की तकनीक होती है। यदि आपके पास बेहतरीन इंजन है तो फिर बाकी सामान उपलब्ध हो जाएगा। भारत को मजबूरी में अपने एलसीए तेजस में अमेरिकन GE- 404 इंजन लगाने पड़े हैं। भारत ने फ्रांस के साथ राफेल विमानों का जो सौदा किया है, उसमें तकनीकी हस्तांतरण (ऑफसेट) की भी एक शर्त है। फ्रांसीसी कंपनी सैफ्रान को भारत में 1 अरब डॉलर के निवेश से तकनीकी हस्तांतरण करना है। भारत की कोशिश है कि सैफ्रान की मदद से कावेरी इंजन के दोषों को दूर कर दिया जाए। ऐसा हो गया तो यह काफी बड़ी सफलता होगी।

कावेरी इंजन में 125 किलोन्यूटन की पावर पैदा हो सकेगी

पता लगा है कि कावेरी इंजन में 125 किलोन्यूटन (Kn) की पावर उत्पन्न की जा सकेगी। यह पावर एलसीए के लिए तो पर्याप्त से काफी ज्यादा है सुखोई जैसे बड़े विमान के अपग्रेड के काम में भी आ सकती है। हालांकि इसके लिए रूस से अनुमति लेनी होगी, पर रूस को आपत्ति होनी नहीं चाहिए। विमान का इंजन बना लेने के बाद लड़ाकू विमानों की तकनीक का महत्वपूर्ण पड़ाव पार हो जाता है।

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