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सेना, कानून, सियासत व प्रेस के दिग्गजों ने सैन्य बलों के जज़्बे को किया सलाम

वरिष्ठ पत्रकार अलोक मेहता

नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित एक सेमिनार में देश की सेना, कानून, सियासत व पत्रकारिता के दिग्गजों ने सैन्य बलों के जांबाज जवानों के सर्वोच्च बलिदान व उनके जब्बे को सलाम किया। अलावा इसके वक्ताओं ने भविष्य की रणनीति पर सुझाव देते हुए गहन विमर्श व विचार व्यक्त की।





भारत-पाक के बीच मौजूदा तनाव तथा उड़ी, पठानकोट, पुलवामा के संदर्भ में कई वक्ताओं ने कहा कि पड़ोसी देश पाकिस्तान को और कड़ा संदेश यह जाना चाहिए कि भारत बालाकोट जैसी सर्जिकल स्ट्राइक सीमा पार जाकर कभी भी और कहीं भी कर सकता है।

सेमिनार में वक्ताओं ने आतंकवाद के खतरों, चुनौतियों तथा उससे निपटने के लिए कारगर सुझाव दिए। आतंकवाद पर चिंता जताते हुए सभी वक्ताओं का मानना था कि स्मार्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। बातचीत के रास्ते के साथ-साथ कड़ी सैन्य कार्रवाई का संदेश भी बेहद अहम भूमिका निभा सकता है। जम्मू-कश्मीर घाटी के किशोरों-युवाओं को देश के साथ जोड़ने और देश के शेष हिस्सों के नागरिकों को घाटी के साथ हर तरह से जोड़ने की जरूरत पर वक्ताओं ने बल दिया।

जवानों को सलाम

सैन्य ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में योजनाबद्ध ढंग से तत्काल काम करने की आवश्यकता बताते हुए कुछ वक्ताओं ने कहा कि गोला-बारूद और हथियारों को और उन्नत बनाना होगा। यह भी कहा गया कि किसी सैनिक जज्बा तथा मनोबल तब और बढ़ जाता है जब उसके पास अति अधुनिक हथियार होते हैं।

‘A Tribute to The Armed Forces And The March Ahead’ विषय पर आयोजित इस सेमिनार का आयोजन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व सीनियर एडवोकेट रुपिंदर सिंह सूरी तथा सेंटर फॉर यूनिफायिंग सोसाइटीज एंड रिसर्च के संस्थापक व अध्यक्ष प्रवीर बाकची की अगुवाई में हुआ।

सेमिनार में लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) पीके सिंह, जनरल (रिटायर्ड) दीपक कपूर, एयर मार्शल (रिटायर्ड) विनोद कुमार भाटिया, एडमिरल (रिटायर्ड) सतीश सोनी, सीनियर एडवोकेट रुपेंदर सिंह सूरी व अशोक भान, जस्टिस(रिटायर्ड) प्रमोद कोहली, पूर्व राज्यपाल अमोलख रतन कोहली, रॉ के प्रमुख अमरजीत सिंह दौलत, वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता व पंकज वोहरा ने अपने-अपने विचार रखे।

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