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शहीद, दिव्यांग सैनिकों के बच्चों की फीस लिमिट 10 हजार तय करने का विरोध

सैनिक स्कूल

नई दिल्ली। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर उस फैसले की समीक्षा करने की मांग की है जिसमें शहीद या दिव्यांग हुए सैनिकों के बच्चों की शैक्षणिक सहायता राशि की सीमा अधिकतम प्रतिमाह 10 हजार रुपये तय कर दी गई है। मीडिया में चल रही खबरों मुताबिक एडमिरल लांबा ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर यह सीमा हटाने का आग्रह किया है।





बता दें की सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद यह सीमा लगाई गई है। इस बाबत आदेश 13 सितंबर को रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ एक्स सर्विसमैन वेलफेयर ने जारी किया था और यह आदेश 1 जुलाई से लागू होना माना गया है। मीडिया खबरों के मुताबिक इस फैसले का लगभग 3400 बच्चों पर असर पड़ेगा और महज 4 करोड़ रुपये बचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

बता दें कि शहीद या दिव्यांग या फिर लापता सैनिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए यह योजना 1972 में लागू की गई थी। इस योजना के तहत स्कूलों कॉलेजों और अन्य व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थानों की ट्यूशन फीस माफ रहती है, पर अब इसकी अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये तय कर दी है। इस फैसले से सैनिकों और पूर्व सैनिकों में रोष है। कई बच्चों की माताओं ने इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को पत्र भी लिखे हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी यह फैसला वापस लेने की मांग की है।

 

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