Army

मेजर शैतान सिंह जिन्होंने रेजांग ला युद्ध में लिखी शौर्य और वीरता की कहानी, जानें 9 खास बातें

18 नवंबर, 1962 में रेजांग ला में भारत-चीन युद्ध के दौरान अदम्य साहस, अनुकरणीय सूझबूझ और शौर्य के साथ लड़ते हुए मेजर शैतान सिंह भाटी शहीद हो गए थे। रेजांग ला की जंग न केवल चीन के दांत खट्टे करने के लिए जानी जाती है बल्कि इतिहास के पन्नों में एकतरफा युद्ध विराम के लिए मजबूर किए जाने के लिए भी प्रसिद्ध है। मेजर शैतान सिंह भारत मां का एक ऐसा लाल जिसने मरते दम तक देश के लिए मर मिटने की कसमें खाई थीं और ऐसा किया भी।





भारत-चीन युद्ध में  मेजर शैतान सिंह के साथ मात्र कुछ सैनिक बचे लेकिन वह बुरी तरह लहू-लुहान थे। इस दौरान मेजर के दोनों हाथ घायल हो चुके थे। सैनिकों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने को कहा पर शैतान सिंह ने सैनिकों से कहा कि उनके पैरों के साथ लाइट मशीनगन बांध दी जाए। सैनिकों ने ऐसा ही किया और मेजर अपने पैरों से फायरिंग करते हुए शहीद हो गए। सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह हमेशा मदर इंडिया के सबसे जांबाज सपूत के रूप में याद किए जाते हैं। इस जांबाज मेजर से जुड़े कुछ ऐसी ही बातें हम आपको बता रहे हैं :-

शैतान सिंह  ने 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान बहादुरी से किया सेना का नेतृत्व 

1924 में एक दिसंबर को जोधपुर (राजस्थान) में जन्मे सिंह को वीरता और बहादुरी विरासत में मिली।  उनके पिता हेमसिंह भाटी भी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल रहे थे। 1949 में बीए करने के बाद वह जोधपुर रियासत की सेना में भर्ती हुए। बाद में जोधपुर रियासत की सेना का भारतीय सेना में विलय होने के बाद वह कुमाऊ रेजिमेंट में शामिल हो गए।  1961 के गोवा युद्ध में भी हिस्सा लिया था।

Comments

Most Popular

To Top