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खास खबर: LoC पर लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट ने मनाया सेना दिवस

लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट, जीओसी

नई दिल्ली। ठंड से जमा देने वाला तापमान, प्रतिकूल मौसम से जूझते हुए और खुद की आराम की परवाह न करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट, जीओसी HQ- 15 कोर, श्रीनगर ने जम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखा पर गोरखा राइफल्स (5/9-जीआर) की टुकड़ी के साथ सेना दिवस मनाया।





सेना दिवस पर जनरल ऑफिसर का दौरा उस अदम्य साहसिक भावना का प्रतीक है और यही भावना भारतीय सेना में कूट कूट कर भरी हुई है जो जमीनी स्तर के सैनिकों के साथ जुड़ाव की क्षमता दर्शाती है। जाति, धर्म या संप्रदाय से अलग भाईचारे, मैत्री की भावना से ओतप्रोत  यह उन्हें एक अनूठा भारतीय नागरिक बनाती है जो उन्हें राष्ट्र प्रथम के असीमित दायित्व से भर देता है। उत्कृष्टता की परंपरा के साथ युद्ध और शांति दोनों ही समय में राष्ट्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता के साथ सैनिक निःस्वार्थता के दूत होते हैं।

सेना दिवस

गौरतलब है कि 15 जनवरी, 1949 जनरल केएम करिअप्पा भारतीय सेना के प्रथम भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने थे। इस दिवस को अब हर साल सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूरा देश भारतीय सैनिकों का सम्मान सेना दिवस पर उनकी उपलब्धियों और बलिदानों का स्मरण करने के साथ करता है। भारतीय सेना राष्ट्रीय आपदाओं सहित सभी आपातकालीन स्थितियों में देश का अंतिम सहारा होती है।

भारतीय सेना ग्रामीण भारत की असाधारण क्षमताओं का प्रतीक है जहां से वह प्रतिभाशाली युवाओं को अपना अंग करती है और कुशल प्रशिक्षण के बाद उन्हें विश्व के सबसे बेहतरीन पेशागत जवानों के आकार में ढाल देती है। आमतौर पर वीरता के व्यक्तिगत कारनामों की सार्वजनिक सराहना होती है लेकिन काम करने की परिस्थितियां, प्रतिबद्धता और अज्ञात सैनिकों का साहस व बलिदान, जिन्होंने हमें आजादी, सुरक्षा तथा संप्रभुता दिलाई, अकसर उपेक्षित बने रहते हैं।

 

 

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