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आखिरी सलाम : मासूम ने शहीद पिता को इस तरह दी श्रद्धांजलि, रो पड़ा हर शख्स का दिल

martyr deepak-nainwal

देहरादून। जिसने भी यह दृश्य देखा उसका दिल रो पड़ा। दृश्य था ही कुछ ऐसा। एक मासूम बच्ची के सामने उसके पिता का पार्थिव शरीर था और वह बिलख रही थी। हालांकि बच्ची समृद्धि की उम्र इतनी नहीं है कि वह ज्यादा कुछ समझ पाए लेकिन जीवन और मौत के फर्क का उसे जरूर पता है। वह जानती है कि उसके पिता उसे और उसके परिजनों को छोड़कर चले गए हैं। घर और परिवार में मचे हाहाकार ने उसे बता दिया है कि उसने क्या खो दिया है। अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए जब समृद्धि ने कहा कि उसके पिता आसमान में स्टार बन गए हैं तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल रो पड़ा।





इस मासूम बच्ची के पिता थे दीपक नैनवाल। राष्ट्रीय राइफल्स के जाबांज जवान दीपक नैनवाल पिछले महीने की दस तारीख को कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों को ललकार रहे थे, उनके हमले का मुंहतोड़ जवाब दे रहे थे। मुठभेड़ के दौरान अचानक एक के बाद एक दो गोलियां दीपक के फेफड़े को चीरती हुए दिल के पास धंस गईं। उन्हें फौरन इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। चूंकि गोलियां दिल के पास लगी थीं इसलिए उनके शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। इलाज के लिए पहले उन्हें दिल्ली भेजा गया और बाद में पुणे के पैराप्लेजिक रिहैब सेंटर ले जाया गया। चालीस दिन तक जिंदगी से संघर्ष करने के बाद अंततः राष्ट्र की रक्षा के लिए सीने पर गोलियां झेलने वाले दीपक नैनवाल रविवार को शहीद हो गए। पुणे के पैराप्लेजिक रिहैब सेंटर में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

देहरादून के सिद्धपुरम निवासी दीपक नैनवाल वर्ष 2001 में सेना में भर्ती हुए थे। पिछले ढाई वर्ष से वह कश्मीर के अनंतनाग में तैनात थे।

दीपक नैनवाल के पिता चक्रधर नैनवाल भी सेना में थे। वह 10 गढ़वाल राइफल में थे। उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के अलावा करगिल युद्ध में भी भाग लिया। दीपक के दादा सुरेशानंद नैनवाल ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भागीदारी की। दीपक के पिता चक्रधर को बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन इस उम्र में बेटे के शव को कंधा देना उनका सबसे बड़ा दुख भी है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद दीपक नैनवाल के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी।

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