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NDA में ऐसे होती है कैडेट्स की ट्रेनिंग

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राष्ट्रीय रक्षा एकेडमी (एनडीए) दुनिया की पहली सैन्य अकादमी है, जहां सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों बल को एक साथ प्रशिक्षित किया जाता है, जो हर साल 27 देशों के तकरीबन 600 से भी ज्यादा कैडेट्स को ट्रेंड करती है यहां कैडेट्स स्टूडेंट्स के रूप में प्रवेश पाते हैं लेकिन जब ट्रेनिंग के बाद वे मजबूत व्यक्तित्व वाले अफसर के रूप में बाहर निकलते हैं।





आइये जानते हैं आखिर कैसी होती है NDA में कैडेट्स की ट्रेनिंग:

तीन साल का कठिन प्रशिक्षण:

NDA राष्ट्रीय रक्षा अकादमी

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA )

राष्ट्रीय रक्षा एकेडमी (पुणे) भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त सेवा एकेडमी है। जहां सेना, नौसेना और वायुसेना के कैडेट्स एक साथ प्रशिक्षित किए जाते हैं। हर साल तकरीबन 4-5 लाख उम्मीदवार एनडीए परीक्षा में शामिल होते हैं, जिनमें से करीब दस हजार उम्मीदवार परीक्षा पास कर पाते हैं। इसके बाद, सेवा चयन बोर्ड (SSB) के लिए जाते हैं। फिर लगभग 9,000 छात्रों के साक्षात्कार के बाद लगभग 300 से 350 कैडेट्स को अकादमी NDA के लिए चुना जाता है।

एक साल का अतिरिक्त प्रशिक्षण

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ट्रेनिंग के दौरान NDA कैडेट्स

एकेडमिक-वर्ष के दौरान एक कैडेट को NDA में स्नातक होने से पहले कुल छह सेमिस्टर (तीन साल) के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। कोर्स के बाद, कमीशन से पहले कैडेट्स को एक वर्ष के प्रशिक्षण के लिए संबंधित प्रशिक्षण अकादमी भेज दिया जाता है, जो सेना कैडेट भारतीय सैन्य एकेडमी (IMA) देहरादून, भारतीय नौसेना एकेडमी (एझिमाला) और वायुसेना के कैडेट्स वायु सेना एकेडमी (दुन्दिगल, हैदराबाद) में जाते हैं।

JNU से मिलती है डिग्री

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JNU से मिलती है कैडेट्स को डिग्री (फाइल फोटो)

पूर्ण प्रशिक्षण के बाद सभी कैडेट्स को बीए/बीएससी, बीसी (कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक किया जाता है और उन्हें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की डिग्री प्रदान की जाती है। एकेडमी प्रशिक्षण के अलावा उन्हें बाहरी कौशल जैसे ड्रिल, शारीरिक प्रशिक्षण और खेल में प्रशिक्षित किया जाता है।

भारतीय नौसेना अकादमी एझिमाला की अनोखी खासियतें

पहली बार मिलता है ‘फौजी कट’ का अनुभव

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NDA कैडेट्स हर चीज रखनी पड़ती है अनुशासित

NDA ज्वाइन करने पर हर उम्मीदवार का पहला अनुभव होता है बाल कटवाना, जो बाहरी दुनिया के लिए उसकी अपनी पहचान बनता है। सभी कैडेट्स को एक साइकिल, एक एकेडमी नम्बर और एक स्क्वाड्रन दिया जाता है, जो ट्रेनिंग के दौरान उनका घर बन जाता है। प्रत्येक कैडेट को उसका कमरा दिया जाता है, लेकिन उनके केबिनों को कभी भी चैक किया जा सकता है, इसलिए केबिनों को व्यवस्थित रखना जरूरी हो जाता है।

A,B,C,D पर बेस्ड हैं स्क्वाड्रन के नाम

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हर कैडेट् को मिलती है साईकिल

यहां 18 स्क्वाड्रन हैं, जिनमें से कुछ के नाम एल्फा, ब्रावो, चार्ली, डेल्टा, इको, जूलियट, किलो, माइक आदि हैं। इनकी खास बात ये है कि ये सभी नाम ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’ पर आधारित हैं। वहीँ, बटालियन नंबर 1,2,3,4 के चार-चार स्क्वाड्रन हैं, जबकि बटालियन नंबर 5 के 2 स्क्वाड्रन हैं।

‘ओरिएंटेशन कैप्सूल’ से होता है स्वागत

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ओरिएंटेशन कैप्सूल’ के तहत NDA कैडेट्स को मानसिक रूप से बनाया जाता है मजबूत

संयुक्त प्रशिक्षण दल (जेटीटी) द्वारा दो महीने तक ‘ओरिएंटेशन कैप्सूल’ के माध्यम से एनडीए कैडेट्स का स्वागत किया जाता है। ये उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने की पहली शर्त है। कैडेट्स को इनडोर व आउटडोर प्रशिक्षण एकसाथ प्रदान किया जाता है। इसके बाद उन्हें हथियार संभालना, मैप रीडिंग, मिलिट्री लॉ जैसे विषय उनके पाठ्यक्रम में शामिल होते हैं।

 

हर मौसम का कड़ा शेड्यूल करते हैं फॉलो

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मैस में भोजन करते NDA कैडेट्स

कैडेट के प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम शुरू होने से पहले ही शेड्यूल तय होता है और ट्रेनिंग के अंत तक उसी शेड्यूल का पालन किया जाता है। शेड्यूल को बारिश,गर्मी या खराब मौसम में भी बदला नहीं जा सकता है। कैडेट्स का पंक्चुअल होना और निश्चित समय पर पहुंचना पड़ता है, चाहे उन्होंने नाश्ता किया हो या नहीं या वे कितनी ही दूर क्यों न हों अन्यथा उन्हें दंडित भी दी जाती हैं। पनिशमेंट में पीठ पर लादे भारी बैगों के साथ कई किलोमीटर की दौड़ भी शामिल होती है।

कठिन दिन के बावजूद बोरिंग नहीं होती ‘लाइफ’

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पास आउट परेड के बाद ख़ुशी मनाते NDA कैडेट्स

 

सभी कैडेट्स सुबह जल्दी उठकर मॉर्निंग रोल-कॉल के बाद अपने प्रशिक्षण में शामिल हो जाते हैं। स्क्वाड्रन लौटने के बाद, तैयार होकर नाश्ते के लिए और फिर अपनी क्लास के लिए निकल जाते हैं। एनडीए कैडेट्स को ट्रेनिंग के दौरान खेलों पर अधिक जोर दिया जाता है अगर उन्हें कोई गेम नहीं आता है तो उन्हें इसे सीखना होता है उनके स्किल्स बढ़ाने और धैर्य की परीक्षा के लिए कठिन टास्क दिए जाते हैं। हां, लेकिन कठिन शेड्यूल के बावजूद कैडेट्स बोर महसूस नहीं करते है। यही, नहीं कैडेट्स को बॉलीवुड व हॉलीवुड मूवीज देखने की भी इजाज़त होती है।

एकेडमी में ट्रेनिंग की इस छोटी अवधि के दौरान, कैडेट्स अपने जीवन को अधिक जुनून से जीना सीखता है। यहां बिताए गए दिन किसी भी कैडेट्स के जीवन के स्वर्णिम क्षण होते हैं, क्योंकि यहां एक-दो दिन नहीं, हर दिन एक नई चुनौती, एक नया अनुभव हासिल करते हैं और देश के जिम्मेदार ऑफिसर बनते हैं।

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